अदालतों में 36 हजार से ज्यादा रेप केस पेंडिंग, न्याय कब मिलेगा पता नहीं

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नई दिल्ली। न्यायिक प्रक्रिया में देरी की वजह से देश की अदालतों में रेप और गैंगरेप के 36 हजार से ज्यादा मामले अभी सुनवाई के दौर में हैं। इसकी बड़ी वजह जजों का न होना भी माना जा रहा है।

क्या कहते हैं आंकड़े ?
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) की ओर से 2016 के जारी आंकड़ों के मुताबिक कोर्ट्स से रेप और गैंगरेप के 36 हजार 657 मामलों पर अब तक फैसला नहीं आया है। देशभर में औसतन हर साल 20 हजार से ज्यादा बच्चियों से रेप के मामले सामने आते हैं।

हर रोज सुनवाई हो तो फैसला आने में लगेंगे इतने महीने
अगर 400 जजों को हर रोज रेप के 50 केसों की सुनवाई करनी हो, तो 10 महीने में 20 हजार केस ही निपटा सकेंगे। यानी रोज सुनवाई के बाद भी एक साल में सारे रेप केस निबट नहीं पाएंगे। वैसे भी अदालतों में जजों के करीब 6 हजार पद खाली हैं। वहीं, हाईकोर्ट में 395 और सुप्रीम कोर्ट में 6 जज नहीं हैं। उधर, रेप केस से अलग अगर महिलाओं के खिलाफ अपराधों की बात करें, तो ऐसे अपराध के करीब 27 हजार केस पेंडिंग हैं।

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