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47 फीसदी लोग ईयरफोन लगाकर करते हैं ड्राइव, ऐसे में होते हैं कुशीनगर जैसे हादसे

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नई दिल्ली। कुशीनगर में हाल में स्कूल वैन की ट्रेन से टक्कर हुई थी। इस हादसे में 13 बच्चों को जान गंवानी पड़ी। वजह ये सामने आई कि ड्राइवर ईयरफोन लगाकर मोबाइल से गाने सुन रहा था और आती हुई ट्रेन का हॉर्न नहीं सुन सका। ये अपनी तरह का पहला हादसा नहीं है, इस तरह के और भी हादसे हो चुके हैं, जब गाड़ी चलाते वक्त ईयरफोन का इस्तेमाल करने से लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन कुशीनगर जैसे हादसों को रोका जा सकता है। अगर लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, दिल्ली के एम्स और नेल्लोर के नारायण मेडिकल कॉलेज के एक शोध पर ध्यान दिया जाए।

क्या कहता है शोध ?
केजीएमयू, एम्स और नेल्लोर के नारायण मेडिकल कॉलेज की ओर से किए गए शोध का नतीजा बताता है कि गाड़ी चलाने वाले 47 फीसदी लोग कान में ईयरफोन लगाए रखते हैं। शोधकर्ताओं से 34 फीसदी लोगों ने बताया कि वो ट्रैफिक नियम भी तोड़ते हैं और रॉन्ग साइड गाड़ी भी चलाते हैं। खास बात ये है कि ईयरफोन का इस्तेमाल करने वाले और ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले 94 फीसदी लोग ये भी जानते हैं कि इससे जान को बड़ा खतरा होता है। इस शोध के लिए 250 टैक्सी और फोर ह्वीलर चलाने वालों से बात की गई थी।

ईयरफोन के इस्तेमाल से कान होते हैं खराब
केजीएमयू, एम्स और नारायण मेडिकल कॉलेज के शोधकर्ताओं के मुताबिक ईयरफोन लगाकर गाने सुनने से कान की सुनने की ताकत लगातार कम होती जाती है। ऐसे लोग इमरजेंसी के दौरान तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दे पाते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक ड्राइविंग लाइसेंस देते वक्त ये देखा जाना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति ठीक से सुन सकता है या नहीं। अब तक ड्राइविंग लाइसेंस देने में सिर्फ ये देखा जाता है कि लाइसेंस जिसे दिया जा रहा है, वो रंगों को पहचानता है या नहीं।

ईयरफोन की वजह से ट्रेनों से हर साल कटते हैं लोग
बता दें कि ईयरफोन की वजह से हर साल ट्रेनों से कटकर भी लोगों की मौत होती है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ यूटाह के शोध के मुताबिक गाड़ी चलाते वक्त फोन पर बात करना उतना ही खतरनाक है, जितना 0.8 फीसदी के स्तर पर शराब पीकर गाड़ी चलाना होता है। वहीं, विशेषज्ञों के मुताबिक ईयरफोन लगाए होने के बाद गाड़ी चलाने पर सिर्फ 60 फीसदी ही ध्यान रहता है।

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