शोध: अवैध शराब पीने में दुनिया में भारतीय सबसे आगे

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  • भारतीय महिलाएं पीती हैं घर में बनी शराब
  • शराब पीना स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती
  • शराब पीने से होता है कैंसर और दिल की बीमारियां
  • अवैध और अल्कोहल के बाकी प्रकार ज्यादा खतरनाक

भारत में शराब पीने का चलन लगातार बढ़ता जा रहा है और इससे आम लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है। आईएचएमई के 2015 के आंकड़ों के मुताबिक भारत में जान गंवाने वाले लोगों में 3.5% की मौत शराब पीने से होती है। शराब पीने वाले खूब पी रहे हैं और प्रति व्यक्ति शराब पीने के आंकड़े भी काफी ज्यादा हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी डब्ल्यूएचओ के मुताबिक दक्षिण-पूर्वी एशिया में प्रति व्यक्ति शराब पीने के आंकड़ों में भारत के लोग सबसे ऊपर हैं। हर साल भारत में प्रति व्यक्ति शराब पीने का आंकड़ा औसतन 28.7 लीटर है। जबकि ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और जर्मनी में ये आंकड़ा हर साल 15 लीटर है।

International Alliance for Responsible Drinking (IARD) (http://www.iard.org/) से फंड किए गए इस शोध के लिए Morsel Research and Development Private Limited (http://morselindia.in/) ने प्रारंभिक डेटा हासिल किए। शोध को संतोष कुमार सिंह के नेतृत्व में कौशलेंद्र कुमार और अनिल कुमार सिंह ने किया।  किया। शोध के जरिए पांच राज्यों में शराब की खपत और इसका समाज और जनसंख्या पर पड़ने वाले असर को जानने की कोशिश की गई।

हर 5 में से 1 शख्स पीता है जमकर शराब

घरों में किए गए सर्वे के नतीजों से साफ होता है कि पांच में से दो (38.6%) लोगों ने बताया कि वो फिलहाल शराब पीते हैं। इनमें से 35.4% गांवों और 44.5% शहरों में रहते हैं। हर रोज शराब पीने वाले वयस्क 9.6% है, जो ग्रामीण इलाकों में 7.6% और शहरों में 13.4% होता है। हर पांच में से एक व्यक्ति (21.7%) खूब शराब पीता है। खास बात ये है कि उम्र और आय बढ़ने के साथ शराब पीने में बढ़ोतरी होती दिखती है। जबकि कम शिक्षित लोग कम शराब पीते हैं। सर्वे के मुताबिक शहरों में मौजूदा वक्त में शराब पीने वाले हर 10 में से 1 व्यक्ति कभी-कभी, लेकिन बहुत शराब पीते हैं। जबकि ग्रामीण इलाकों में ये आंकड़ा महज 6.9% ही है।

शराब की खपत में इन तत्वों की भी भूमिका

सर्वे के नतीजे बताते हैं कि शराब पीने में उम्र, लिंग, शिक्षा, आय, जाति और गांवों में रहने की बड़ी भूमिका भी है। उच्च शिक्षित लोग विदेशी शराब ज्यादा पीते हैं, जबकि गांवों में और कम पढ़े-लिखे लोग देसी और घर में बनी शराब पीने में भरोसा रखते हैं। ज्यादा आय वाले लोगों में विदेशी और देसी शराब का इस्तेमाल सर्वे में ज्यादा पाया गया, लेकिन ऐसे लोगों में घर में बनी शराब कम पीने वाले लोग मिले।

ऊपर दिया गया ग्राफ बताता है कि शराब पीने वालों में कितनी महिलाएं और पुरुष हैं। साथ ही उनकी सामाजिक स्थिति क्या है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में रोज शराब पीने की प्रवृत्ति कम पाई गई। सर्वे के मुताबिक सिर्फ 1.2% महिलाएं ही रोज शराब पीती हैं। जहां तक ज्यादा शराब पीने की बात है, 10.9% के मुकाबले 22.8% महिलाएं सर्वे में देखी गईं। शराब के प्रकारों की बात करें, तो महिलाओं के मुकाबले 48.2% पुरुष विदेशी और 32.2% पुरुष देसी शराब पीने वाले मिले। जबकि घर में बनी शराब को 61.8% महिलाएं पीती हैं। वहीं, ऐसी शराब पीने वाले पुरुष 26.1% ही हैं। वाइन पीने में पुरुषों से आगे महिलाएं हैं। वाइन पीने वाले पुरुष 3.4% तो महिलाएं 20% मिलीं।

हर साल हर व्यक्ति पीता है इतनी शराब

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक भारत में हर साल हर व्यक्ति 15 लीटर शराब पी जाता है। पुरुष जहां औसतन हर साल 32.1 लीटर शराब पीते हैं, वहीं महिलाएं 10.6 लीटर शराब पीती हैं। भारतीयों में शराब पीने में बढ़ोतरी की मुख्य वजह विदेशी शराब का मिलना है। विदेशी शराब में सबसे ज्यादा अल्कोहल होता है और भारत में कुल शराब की खपत का ये करीब 90% है। शराब की इस जबरदस्त खपत की वजह से लोगों को कैंसर, दिल की गंभीर बीमारी और अन्य चोटों का सामना करना पड़ता है और इससे भारतीयों को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर दिक्कतें होती हैं।

अवैध शराब की खपत

सरकारी तंत्र जिस शराब को बेचता है, उससे बाहर भी शराब बनाई और बेची जाती है। इस अवैध शराब की वजह से हर साल भारत में तमाम लोगों को जान गंवानी पड़ती है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक भारत में अवैध शराब का उपयोग 50% लोग करते हैं। अवैध शराब में घर में बनाई जाने वाली शराब, उद्योगों में काम आने वाला अल्कोहल और छिपाकर बनाई गई शराब होती है। सरकारी दुकानों से बिकने वाली शराब का आंकड़ा तो मिल जाता है, लेकिन अवैध शराब का आंकड़ा हासिल करना मुश्किल है, क्योंकि इसे किसी दुकान वगैरा से नहीं बेचा जाता है। इसके अलावा भारत समेत ज्यादातर देशों की सरकारें अवैध शराब के इस्तेमाल का आंकड़ा भी नहीं रखती हैं।

भारत में अवैध शराब (सुरा) की बिक्री पर जनवरी से दिसंबर 2014 के बीच आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल में घरों से आंकड़े जुटाए गए। इन आंकड़ों से भारत की भोगौलिक, सामाजिक और जनसंख्या, राजनीतिक और आर्थिक विविधता का पता चलता है। ऊपर बताए गए पांचों राज्यों में देश की 28% आबादी बसती है। इन राज्यों में सर्वे के दौरान लोगों से उनके सामाजिक और जनसंख्या संबंधी विशेषताओं के बारे में पूछा गया। साथ ही हर राज्य में वहां की स्थानीय भाषा में भी ये जानकारी हासिल की गई कि बीते 12 महीनों में वहां शराब की कितनी खपत रही।

सर्वे से पता चला कि अवैध शराब बड़ी मात्रा में और हर जगह मिलती है। इसकी वजह इसका सस्ता होना है। इससे ये भी पता किया गया कि सामाजिक और जनसंख्या के लिहाज से अवैध शराब का इस्तेमाल भारत में कितना होता है। शोध में सरकार की ओर से बेची जाने वाली शराब, देसी शराब और घरों में बनाई जाने वाली शराब के आंकड़े हासिल करने की कोशिश की गई।

शोध से पता चला कि हर राज्य में अवैध शराब की खपत का अलग-अलग आंकड़ा है। पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा अवैध शराब पी जाती है। इसमें बड़ी मात्रा घर में बनाई जाने वाली शराब का होता है। प्रति व्यक्ति शराब की खपत की बात करें, तो महाराष्ट्र में 8% और पश्चिम बंगाल में 51% लोग अवैध शराब पीते हैं। आंध्र प्रदेश में प्रति व्यक्ति शराब पीने वालों में 29% अवैध शराब पीते हैं। जबकि, मध्यप्रदेश में ये आंकड़ा 31% है।

प्रति व्यक्ति शराब की खपत

2003 से 2005 और 2010 से 2012 के डब्ल्यूएचओ के आंकड़े देखें, तो शराब की खपत में 37.5% की बढ़ोतरी हुई है। 2003-05 में जहां भारत में प्रति व्यक्ति शराब की खपत 1.6 लीटर थी, वहीं 2010-12 में ये आंकड़ा 2.2 लीटर हो गया। बता दें कि भारत में तंबाकू के बाद सबसे ज्यादा शराब का ही सेवन किया जाता है।

शोध के नतीजे बताते हैं कि कुल सैंपल में प्रति व्यक्ति और प्रति वर्ष शराब की खपत औसतन 4.4 लीटर है। हालांकि, ज्यादा शराब पीने वालों में शराब की प्रति व्यक्ति हर साल खपत 11.6 लीटर पाई गई। ये आंकड़ा मौजूदा वक्त में शराब पीने वालों के आंकड़ों से जोड़कर देखें, तो मौजूदा वक्त में प्रति व्यक्ति शराब की खपत 9.5 और ज्यादा शराब पीने वालों में 25.11 ग्राम होता है। शराब की खपत की बात करें, तो अलग-अलग राज्यों में इसका आंकड़ा अलग-अलग है। आंध्र प्रदेश में प्रति व्यक्ति शराब की खपत 9.1 लीटर है। जबकि केरल में ये आंकड़ा 13.6 लीटर है। सर्वे के सभी सैंपल के मुताबिक डिस्टिल्ड अल्कोहल, बीयर और वाइन 3.2 लीटर पी जाती है। वहीं, देसी शराब की खपत का प्रति व्यक्ति आंकड़ा 1.6 लीटर और शुद्ध अल्कोहल का आंकड़ा 0.9 लीटर पाया गया।

शोध का ये है नतीजा

शोध से साफ हो जाता है कि पढ़े-लिखे लोग विदेशी शराब ज्यादा पीते हैं। ऐसे लोगों में देसी और घर में बनी शराब पीने का प्रचलन नहीं दिखता है। जबकि, कम शिक्षित लोगों में देसी और घर में बनी अवैध शराब का प्रचलन ज्यादा मिला। शोध से पता चला कि आय ज्यदा होने पर शराब भी ज्यादा पी जाती है, लेकिन ज्यादा आय वाले अवैध शराब नहीं पीते हैं।

ज्यादा शराब पीने से कैंसर, दिल की गंभीर बीमारियां और चोट लगने की घटनाएं होती हैं। भारत में आम लोगों के स्वास्थ्य को अवैध शराब, शराब के विभिन्न प्रकार और इसका खूब सेवन भी जमकर नुकसान पहुंचा रहे हैं।

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