नरोदा पाटिया मामला : गुजरात HC ने बाबू बजरंगी की सजा रखी बरकरार, कोडनानी निर्दोष करार

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  • बाबू बजरंगी को थोड़ी राहत, ताउम्र उम्रकैद की सजा को घटाकर 21 साल कैद में तब्‍दील किया

अहमदाबाद। गुजरात दंगों के दौरान नरोदा पाटिया नरसंहार मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने बजरंग दल के नेता रहे बाबू बजरंगी की सजा बरकरार रखी है। बाबू बजरंगी को विशेष अदालत ने मौत होने तक कैद की सजा सुनाई थी। पूर्व मंत्री माया कोडनानी को हाईकोर्ट ने निर्दोष करार दिया है। हालांकि हाईकोर्ट ने बाबू बजरंगी को थोड़ी राहत देते हुए उसकी ताउम्र उम्रकैद की सजा को घटाकर 21 साल कैद में तब्‍दील कर दिया है।

क्या है नरोदा पाटिया मामला ?
गोधरा में 27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस के कोच को आग लगाए जाने से कारसेवकों की मौत के बाद गुजरात में भीषण दंगे हुए थे। इसी दौरान 28 फरवरी को अहमदाबाद के नरोदा पाटिया इलाके में उस दौर का सबसे बड़ा नरसंहार हुआ था। दंगाइयों ने नरोदा पाटिया में 97 लोगों की जान ली थी। इस दौरान 33 लोग घायल हुए थे।

एसआईटी ने की थी जांच
नरोदा पाटिया नरसंहार को गुजरात दंगे का सबसे काला अध्याय माना जाता है। साथ ही ये मामला विवादास्पद भी है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी एसआईटी ने गुजरात दंगों के जिन 9 मामलों की जांच की थी, उनमें नरोदा पाटिया का मामला भी शामिल था।

पिछले साल सुनाई गई थी सजा
नरोदा पाटिया कांड के मुकदमे की अगस्त 2009 में विशेष अदालत में सुनवाई शुरू हुई थी। इस मामले में माया कोडनानी और बाबू बजरंगी जैसे हाई प्रोफाइल लोगों समेत 62 आरोपी थे। एक आरोपी विजय शेट्टी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। 2017 में विशेष अदालत ने माया और बाबू बजरंगी समेत 32 लोगों को दोषी ठहराया था। 29 अन्य बरी कर दिए गए थे।

किसे कितनी सजा मिली थी ?
पूर्व मंत्री माया कोडनानी को उम्रकैद और बाबू बजरंगी को कोर्ट ने आखिरी सांस तक जेल की सजा सुनाई थी। दंगे की जांच करने वाली एसआईटी ने कोर्ट में कहा था कि घटना के दिन सुबह विधानसभा में गोधरा कांड में मरने वाले कारसेवकों की याद में शोक सभा हुई थी। जिसके बाद मंत्री माया कोडनानी नरोदा पाटिया गईं, जहां उन्होंने लोगों को अल्पसंख्यकों पर हमले के लिए उकसाया।

कोडनानी के लौटने के बाद हिंसा हुई
एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि लोगों को हिंसा के लिए उकसाने के बाद माया कोडनानी वहां से चली गईं। जिसके बाद दंगे शुरू हुए। कोडनानी के वकील ने इस पर कोर्ट में कहा कि उनकी मुवक्किल के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। गुजरात हाईकोर्ट में जस्टिस हर्षा देवानी और जस्टिस एएस सुपेहिया ने दोषियों की अर्जी पर अगस्त 2017 में सुनवाई पूरी कर ली थी। नरोदा पाटिया मामले में 11 रिव्यू पिटिशन फाइल हुई थीं। इनमें से 4 एसआईटी की थीं।

क्या था गोधरा कांड ?
गुजरात में 27 फरवरी, 2002 को गोधरा रेलवे स्टेशन पर खड़ी साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के डिब्बे में आग लगने (कहते हैं आग लगाई गई) से अयोध्या से लौट रहे कारसेवकों की जलकर मौत हुई थी। इसके बाद पूरे गुजरात में दंगे शुरू हो गए थे। इन दंगों में हजारों लोगों की जान गई थी। दंगों में जान गंवाने वालों में कांग्रेस के पूर्व सांसद अहसान जाफरी भी थे।

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