जज लोया केस : सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कांग्रेस को झटका

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  • कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियां चाहती थीं जज लोया केस की एसआईटी जांच हो
  • SC ने कहा, राजनीति से प्रेरित है याचिका, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विताओं के लिए कोर्ट सही जगह नहीं

 नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (19 अप्रैल) को अपने फैसले में कहा है कि जज लोया मामले की एसआईटी जांच नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्र जांच की मांग की याचिका को भी आधारहीन बताते हुए खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से कांग्रेस को करारा झटका लगा है। बता दें कि कांग्रेस चाहती थी कि इस मामले की जांच एसआईटी से कराई जाए।

राहुल गांधी ने राष्‍ट्रपति को दी थी याचिका

उल्‍लेखनीय है कि इस साल 9 फरवरी को विपक्षी दलों के नेताओं ने कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्‍व में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात कर जस्टिस लोया की मौत की एसआईटी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। विपक्षी नेताओं ने कहा कि उन्हें सीबीआई या एनआइए की जांच पर भरोसा नहीं है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी से जांच कराई जानी चाहिए। राष्ट्रपति को विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांग को लेकर एक ज्ञापन भी सौंपा, जिस पर विपक्ष के करीब 15 दलों के 115 सांसदों के हस्ताक्षर थे।

SC ने याचिकाकर्ता को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में याचिकाकर्ताओं को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि एसआईटी जांच वाली याचिका में कोई दम नहीं है। इस मामले की सुनवाई कर रही चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा कि पीआईएल से न्यायपालिका की छवि ख़राब करने और उसे बदनाम करने की कोशिश की गई। कोर्ट ने सख्‍त लहजे में कहा कि याचिका राजनीति से प्रेरित लगती है और राजनीतिक और व्‍यावसायिक लड़ाई कोर्ट में नहीं होनी चाहिए।

कोर्ट ने कीं तल्‍ख टिप्‍पणियां

सुप्रीम कोर्ट ने जज बीएच लोया की मौत की जांच की मांग की याचिकाओं के को खारिज करते हुए कुछ कड़ी बातें कहीं। आइए जानते हैं कोर्ट ने क्‍या-क्‍या कहा –

  • जस्टिस लोया की मौत प्राकृतिक थी और और इस पर कोर्ट को संदेह नहीं है।
  • जिस तरह से इस केस में याचिका डाली गई है, वो सीधा न्यायपालिका पर हमला है।
  • ये याचिका आपराधिक अवमानना के समान है, मगर हम कोई कार्रवाई नहीं कर रहे।
  • इसके माध्‍यम से PIL का दुरुपयोग किया गया, जो चिंता का विषय है।
  • जनहित याचिकाओं का इस्तेमाल एजेंडा वाले लोग कर रहे हैं। याचिका के पीछे असली चेहरा कौन है पता नहीं चलता।
  • तुच्छ और मोटिवेटिड जनहित याचिकाओं से कोर्ट का वक्त खराब होता है। हमारे पास लोगों की निजी स्वतंत्रता से जुड़े बहुत केस लंबित हैं।
  • याचिकाकर्ता का उद्देश्य जजों को बदनाम करना है। PIL शरारतपूर्ण उद्देश्य से दाखिल की गई।
  • राजनीतिक प्रतिद्वंद्विताओं को लोकतंत्र के सदन में ही सुलझाना होगा, कोर्ट में नहीं।
  • हम उन न्यायिक अधिकारियों के बयानों पर संदेह नहीं कर सकते, जो जज लोया के साथ थे
  • याचिकाकर्ताओं ने याचिका के जरिए जजों की छवि खराब करने का प्रयास किया। कोर्ट कानून के शासन के सरंक्षण के लिए है।

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