लंदन में बोले पीएम मोदी – मैं विकास को बना रहा हूं जनआंदोलन

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  • प्रधानमंत्री मोदी ने वेस्‍टमिंस्‍टर हॉल में भारतीय मूल के लोगों को किया संबोधित
  • बोले – बेसब्री ही मेरी ऊर्जा, जिस दिन बेसब्री खत्म हो जाएगी देश के काम का नहीं रहूंगा

लंदन। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कॉमनवेल्‍थ समिट में हिस्‍सा लेने के लिए बुधवार (18 अप्रैल) को लंदन पहुंचे। सुबह उन्‍होंने प्रिंस चार्ल्‍स और ब्रिटेन की प्राइम मिनिस्‍टर टेरीजा में से उनके निवास 10 डाउनिंग स्‍ट्रीट में मुलाकात की। इसके बाद लंदन के वेस्टमिंस्टर सेंट्रल हॉल में ‘भारत की बात, सबके साथ’ कार्यक्रम में भारतीय मूल के नागरिकों को संबोधित किया। इस मौके पर उन्‍होंने महात्‍मा गांधी को याद करते हुए कहा, ‘महात्मा गांधी ने आजादी के संघर्ष की पूरी भावना को एक किया। उन्‍होंने आजादी को जनआंदोलन में बदल दिया। मैं विकास को जन-आंदोलन बनाना चाहता हूं और उसी काम में जुटा हूं।’

बेसब्री से आगे बढ़ने की मिलती है प्रेरणा

वेस्‍टमिंस्‍टर हॉल में हुए इस कार्यक्रम का संचालन सेंसर बोर्ड के चेयरमैन, गीतकार और कवि प्रसून जोशी ने किया। गीतकार प्रसून जोशी के सवाल पर पीएम मोदी ने कहा, ‘रेलवे स्‍टेशन मेरे संघर्ष का गवाह रहा, रेलवे स्‍टेशन पर रहकर मैंने जूझना सीखा।’ प्रशांत दीक्षित ने सवाल किया कि भारत में इन दिनों बहुत काम हो रहा है, फिर भी बेसब्री क्यों है? इस पर पीएम मोदी ने कहा, ‘जिस पल संतोष का भाव पैदा हो जाता है, ज़िंदगी कभी आगे नहीं बढ़ती। हर आयु, युग और अवस्था में कुछ न कुछ नया करने का मकसद गति देता है। अगर कोई कहता है कि बेसब्री बुरी चीज़ है तो वो बूढ़ा हो सकता है। बेसब्री देश के लोगों के दिल में प्रगति के बीज बोती है, मैं बेसब्री को बुरा नहीं मानता हूं। मैं मानता हूं जिस दिन मेरी बेसब्री खत्म हो जाएगी उस दिन मैं भारत के लिए किसी काम का नहीं बचूंगा।’

लोकतंत्र 5 साल का लेबर कॉन्‍ट्रैक्‍ट नहीं

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘अगर आपके पास स्पष्ट नीति और नेक इरादे हों तो आप सर्वजन हिताय का काम कर सकते हैं। लोकतंत्र 5 साल के लिए दिया गया लेबर कॉन्ट्रैक्ट नहीं, बल्कि भागीदारी का काम है। आज सवा सौ करोड़ देशवासियों के दिल में इच्छाएं हैं। हमें खुशी है कि हमने ऐसा माहौल बनाया कि लोग हमसे ज्यादा की अपेक्षा करते हैं। कुछ लोगों को लगता है कि छोड़ो कुछ होने वाला नहीं है। मैं दूसरे प्रकार का इंसान हूं, मैं गिलास देखकर बताता हूं कि वह आधा पानी से भरा है और आधा हवा से भरा है।’

सेना के जवानों पर गर्व है

भारत द्वारा पाकिस्‍तान के खिलाफ की गई सर्जिकल स्‍ट्राइक पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में पीएम मोदी ने कहा, ‘जब कोई आतंकवाद एक्सपोर्ट करने का उद्योग बनाकर बैठा हो और पीठ पर वार करने का प्रयास होता हो तो यह मोदी उसी भाषा में जवाब देना जानता है।’ पीएम मोदी ने कहा, ‘हमारे जवानों को, टेंट में सोए जवानों को मारा गया। आपमें से कोई चाहेगा मैं चुप रहूं ? उनको ईंट का जवाब पत्‍थर से देना चाहिए था या नहीं ? इसलिए सर्जिकल स्ट्राइक किया। हमें अपनी सेना पर गर्व है। जो योजना बनी थी, सेना ने उसे अच्छे से इंप्लीमेंट किया। यह स्ट्राइक भारत के वीरों का पराक्रम था। सभी को पता होना चाहिए कि अब हिंदुस्तान बदल चुका है।’

आज दुनिया भारत का लोहा मानने लगी है

पीएम मोदी ने कहा, ‘आज दुनिया भारत का लोहा मानने लगी है। आज भारत की हर जगह चर्चा हो रही है। मैंने शुरुआत में ही कहा था कि न हम आंख झुकाकर बात करेंगे, न हम आंख उठाकर करेंगे, हम आंख मिलाकर बात करेंगे। मानवता के काम में भारत कभी पीछे नहीं रहा। रोहिंग्या शरणार्थियों तक भारत ने मदद पहुंचाई। हर इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म में भारत एजेंडा सेट करता है। भारत दुनिया में नए सिरे से अपनी अहमियत बना रहा है।’

देश में लाखों समस्याएं लेकिन करोड़ों समाधान भी

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मैंने कभी नहीं कहा कि मैं अकेले देश बदल दूंगा। मैं मानता हूं कि देश में लाखों समस्याएं हैं, लेकिन करोड़ों समाधान भी हैं। हर तरह की ठोकरें खाकर यहां तक पहुंचा हूं। मैंने भी कभी कविता लिखी थी कि जो लोग मुझे पर पत्थर फेंकते हैं, मैं उससे पथ बना देता हूं और उस पर ही चल पड़ता हूं।

किसी के लिए बोझ नहीं बनना चाहता

अथक परिश्रम करने के मुद्दे पर पीएम ने कहा, ‘अपनों के लिए काम करने से कोई नहीं थकता। मेरी जिंदगी का हर पल देश के लिए है। मेरे लिए देश के सवा सौ करोड़ भारतीय, मेरा परिवार हैं। मैं नहीं चाहता कि कभी किसी के लिए बोझ बनूं। शरीर की पूरी ताकत का इस्तेमाल करना चाहता हूं और ऐसे ही हंसते-खेलते चले जाना चाहता हूं।

वेस्टमिंस्टर हॉल का है अनोखा इतिहास

गौरतलब है कि जिस वेस्टमिंस्टर हॉल से पीएम मोदी ने लोगों को संबोधित किया उसका एक अनोखा इतिहास है। दरअसल, यह हॉल पहले मेथॉडिस्ट सेंट्रल हॉल के नाम से जाना जाता था। यह लंदन के सबसे बड़े मल्टी परपज वेन्यू में से एक है। यहां 1946 में पहली बार संयुक्त राष्ट्र सभा का आयोजन किया गया था। इसी हॉल में वर्ष 1931 में महात्मा गांधी ने भाषण दिया था। महात्मा गांधी के अलावा मार्टिन लूथर किंग, दलाई लामा और प्रिंसेस डायना भी यहां भाषण दे चुके हैं।

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