ताजमहल पर हक : सुप्रीम कोर्ट में शाहजहां के दस्तखत पेश नहीं कर पाया सुन्नी बोर्ड

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  • बोर्ड ने कहा कि वक्फ को मिली संपत्ति खुदा की होती है, इसलिए ताजमहल का मालिक है खुदा 
  • ताजमहल पर मालिकाना हक को लेकर सुन्नी वक्फ बोर्ड व एएसआई के बीच चल रहा है विवाद

नई दिल्ली। ताजमहल पर मालिकाना हक के मामले पर मंगलवार (17 अप्रैल) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, लेकिन मालिकाना हक जताने वाला सुन्नी वक्फ बोर्ड कोर्ट में अपने पक्ष में कोई सबूत पेश नहीं कर पाया। वक्‍फ बोर्ड ने कहा कि वह अब ताजमहल पर दावा नहीं करेगा। इस पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि वक्फ बोर्ड कोर्ट का वक्त बर्बाद कर रहा है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 27 जुलाई को होगी। बता दें कि यह विवाद सुन्नी वक्फ बोर्ड और आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) के बीच चल रहा है।

क्‍या कहा सुप्रीम कोर्ट ने ?

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर व न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि बोर्ड द्वारा एक बार स्मारक पर अपने अधिकार का दावा करने के बाद इस मुद्दे पर निर्णय करना होगा। पीठ ने कहा, ‘आप ने एक बार स्मारक को यदि वक्फ की संपत्ति के रूप में पंजीकृत करा दिया तो आपका यह बयान कि आप दावा नहीं करेंगे, मदद नहीं करेगा।’

पिछली सुनवाई में क्‍या कहा था कोर्ट ने ?

बता दें कि 11 अप्रैल को पिछली सुनवाई में वक्फ बोर्ड ने दावा किया था कि मुगल बादशाह शाहजहां ने अपने दस्‍तखत से बोर्ड के पक्ष में ताजमहल का वक्फनामा किया था। इस पर चीफ जस्टिस ने वक्फ बोर्ड के वकील से पूछा था, ‘शाहजहां ने वक्फनामे पर दस्तखत कैसे किए? वह तो जेल में बंद थे। वह हिरासत से ही ताजमहल देखते थे।’ कोर्ट ने वक्‍फ बोर्ड से अपने दावे के समर्थन में शाहजहां के दस्तखत वाला हलफनामा पेश करने को कहा। इस पर बोर्ड के वकील ने एक हफ्ते की मोहलत मांगी थी।

ताजमहल का वारिस आया सामने, बोला – शाहजहां ने अपने दस्तखत से दिया

क्‍या कहा सुन्‍नी वक्फ बोर्ड ने ?

ताजमहल पर अपनी दावेदारी जता रहा सुन्‍नी वक्फ बोर्ड मंगलवार को कोर्ट में नरम नजर आया। उसने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने कहा कि ताजमहल का असली मालिक खुदा है। जब कोई संपत्ति वक्फ को दी जाती है तो वह खुदा की संपत्ति बन जाती है। बोर्ड ने कहा कि उसे कोई दिक्क्त नहीं है कि ताजमहल की देखरेख एएसआई करे, लेकिन बोर्ड का यहां नमाज पढ़ने और उर्स जारी रखने का हक बरकरार रहे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बोर्ड से कहा कि उसे इस बारे में एएसआई से बात करनी चाहिए। इस पर एएसआई ने विचार करने के लिए मोहलत मांगी।

बोर्ड के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया था स्टे

गौरतलब है कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जुलाई 2005 में आदेश जारी कर ताजमहल को अपनी प्रॉपर्टी के तौर पर रजिस्टर करने को कहा था। एएसआई ने इसके खिलाफ 2010 में सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। इस पर कोर्ट ने बोर्ड के फैसले पर स्टे लगा दिया था। एएसआई की ओर से पेश एडवोकेट एडीएन राव ने कहा कि ताजमहल भारत सरकार का है।

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