जब कई माननीयों पर ही महिलाओं से अपराध के आरोप, तो भला कैसे रुकें रेप ?

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नई दिल्ली। बीते कुछ साल से रेप और गैंगरेप के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। जम्मू-कश्मीर से लेकर बिहार के सासाराम तक बच्चियों तक को दरिंदों ने नहीं बख्शा है। रेप करने वालों को मौत की सजा देने की मांग तो दिल्ली के चर्चित निर्भया कांड के बाद से ही उठ रही है, लेकिन अब तक इस बारे में जनप्रतिनिधियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। वजह ये भी मानी जा रही है कि हमारे देश के तमाम जनप्रतिनिधियों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध और यहां तक कि रेप के भी आरोप हैं।

कितने माननीयों पर हैं आरोप ?
1581 मौजूदा जनप्रतिनिधियों का क्रिमिनल रिकॉर्ड है। इनमें से 51 माननीयों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध का मामला दर्ज है। 4 जनप्रतिनिधि ऐसे हैं, जिन पर रेप का केस है।

किस पार्टी में कितने आरोपी माननीय ?
महिलाओं के खिलाफ अपराध के केस में सबसे ज्यादा बीजेपी के 14 जनप्रतिनिधि हैं। शिवसेना में ऐसे माननीयों की संख्या 7 और तृणमूल कांग्रेस में 6 है।

10 साल में कितने रेप के मामले ?
बीते 10 साल की बात करें तो 2 लाख 78 हजार 866 रेप के मामले इस दौरान पुलिस ने दर्ज किए। 2015 में 29.4 फीसदी मामलों और 2016 में 25.5 फीसदी मामलों में सजा हुई। हालात ये हैं कि 2016 में रेप के 38 हजार 947 मामले दर्ज हुए। यानी हर घंटे औसतन 39 रेप। इनमें गिरफ्तार हर 4 में से 1 को ही सजा हुई।

2016 में रेप के मामलों में अव्वल राज्य
साल 2016 की बात करें, तो सबसे ज्यादा रेप के 4882 मामले मध्यप्रदेश में हुए। राजस्थान में 4816, महाराष्ट्र में 4816 और यूपी में 4816 रेप केस दर्ज हुए। वहीं, दिल्ली में 2016 में रेप के 2155 मामले दर्ज हुए थे। जम्मू-कश्मीर में इस दौरान रेप के 256 वारदात हुए थे।

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