आखिर कब रुकेगी अक्षय तृतीया पर ये कुप्रथा…

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लखनऊ ।आज अक्षय तृतीया का त्योहार है। ये त्योहार बड़े ही उत्साह और खुशहाली के साथ मनाया जाता है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन जो भी शुभ काम किए जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है। लोग इसलिए इस मौके पर घर-परिवार की समृद्धि की दुआ करते हैं। इस दिन सोना खरीदना शुभ माना जाता है।

वहीं राजस्थान में इस दिन ऐसी प्रथा प्रचलन में है जो किसी की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। सुनने में भले ही ये अजीब लगे लेकिन बता दें कि इस मौके पर राजस्थान में बाल विवाह का रिवाज है।

हिंदू मान्यता के अनुसार, अक्षय तृतीया या आखा तीज का दिन बहुत स्पेशल है। इस दिन किसी को कोई शुभ काम करने के लिए पंचाग देखने की जरूरत नहीं होती। इस दिन आप कोई भी शुभ काम कर सकते हैं।

शायद यही वजह थी कि पुराने जमाने में इस दिन बाल विवाह होने लगे। आज ये नौबत आ गई है कि यह दिन केवल बाल विवाह के लिए ही जाना जाने लगा है।

वही नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक देश में 26.8 प्रतिशत लड़कियों और 20.3 प्रतिशत लड़कों की शादी बालिग होने से पहले ही हो जाती है।

सरकारी आंकड़ों की मानें तो राजस्थान में 35 फीसदी लड़कियों की शादी 18 वर्ष से कम उम्र में हो रही है। हालांकि पिछले 10 सालों में यह आंकड़ा 65 प्रतिशत से घटकर 35 फीसदी रह गया है। बाल विवाह क़ानूनन अपराध है, इसके बावजूद आज भी लोग बाल विवाह करा रहे हैं।

जितनी जम्मू कश्मीर की टोटल पॉपुलेशन है, उतने बाल विवाह हुए हैं देश में। 1.2 करोड़ भारतीय ऐसे हैं जिनकी शादी 10 बरस की उम्र से पहले हो गई। हिंदुओं की हालत ज्यादा खराब है. इनमें 84 फीसदी हिंदू और 11 फीसदी मुसलमान हैं। बाल विवाह वाले 1.2 करोड़ में से 65 फीसदी यानी 78 लाख लड़कियां है। नाबालिग उम्र में ब्याही गई लड़कियों में 10 में से 8 लड़कियां अनपढ़ हैं। इनमें ज्यादातर लड़कियां गांवों की होती है.10 बरस से कम उम्र में ब्याही गई लड़कियों में 74 फीसदी हिंदू हैं और 58.5 फीसदी मुस्लिम।

हालांकि बीते सालों में बाल विवाह में कमी जरूर आई है, लेकिन इस पर रोक लगाने के लिए ठोस प्रयास करने की जरूरत है।

 

 

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