WOW: भारतीय वैद्यों का कमाल, 14 टैबलेट खाइए डेंगू दूर भगाइए

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नई दिल्ली। आयुष मंत्रालय के सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेद यानी सीसीआरएएस ने डेंगू के इलाज के लिए दवा बनाने में सफलता पाई है। मरीजों पर पायलट स्टडी सफल रहने के बाद अब दवा के क्लीनिकल ट्रायल किए जा रहे हैं।

कब तक बाजार में आएगी दवा ?
क्लीनिकल ट्रायल पूरा होने के बाद 2019 तक ये दवा बाजार में आ जाएगी। डेंगू की ये दवा आयुर्वेदिक है और 7 औषधीय पौधों के अर्क से इसे तैयार किया गया है। दवा तैयार करने में सीसीआरएएस के दर्जनभर से ज्यादा वैद्य दो साल तक जुटे रहे।

कहां चल रहा है क्लीनिकल ट्रायल ?
सीसीआरएस और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर मिलकर इस दवा का क्लीनिकल ट्रायल कर्नाटक के बेलगाम और कोलार मेडिकल कॉलेज में कर रहे हैं। क्लीनिकल ट्रायल सितंबर 2019 तक पूरा होगा। पायलट स्टडी में दवा के साइड इफेक्ट मरीजों पर नहीं दिखे।

डेंगू होने पर क्या होगा दवा का डोज
क्लीनिकल ट्रायल में मरीजों को टैबलेट के रूप में दवा दी जा रही है। हर दिन दो टैबलेट के हिसाब से सात दिन दवा खिलाई जा रही है। आयुर्वेदिक दवा होने की वजह से इसकी कीमत भी कम ही रहने के आसार हैं।

दुनिया के बाकी देश नहीं खोज सके दवा
हर साल डेंगू के दुनियाभर में 5 से 10 करोड़ नए मामले सामने आते हैं। बच्चों को एडीज एजेप्टी मच्छरों के काटने से होने वाली ये बीमारी काफी होती है। इस बीमारी में ब्लड में प्लेटलेट की संख्या गिर जाती है। जिसकी वजह से तमाम मरीजों की मौत होती है। डेंगू की अब तक कोई दवा नहीं बन सकी थी। ऐसे में सिर्फ बुखार कम करने की ही दवा मरीज को दी जाती है।

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