‘दीन बचाओ, देश बचाओ’ सम्मेलन में सांप्रदायिकता के खिलाफ उठी आवाज

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  • पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में जुटे लाखों मुसलमान, सुरक्षा के किए गए थे कड़े इंतजाम

पटना बिहार की राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में रविवार (15 अप्रैल) को ‘दीन बचाओ-देश बचाओ’ रैली का आयोजन किया गया। इमारत-ए-शरिया और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के संयुक्‍त तत्‍वावधान में आयोजित इस सम्‍मेलन में इस्‍लाम और देश पर मंडरा रहे खतरे के विरोध में सड़कों पर उतरने की घोषणा की गई। आयोजकों के मुताबिक, इस रैली का मकसद देश में धार्मिक उन्माद की राजनीति को खत्म करना और आपसी सौहार्द्र, भाईचारे को मजबूत करना है।

देश के साथ-साथ इस्लाम पर भी खतरा

बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने कहा – ‘हमने चार साल इंतजार किया और सोचा कि बीजेपी संविधान के तहत देश चलाना सीख लेगी।’ उन्होंने कहा, ‘मुसलमानों के पर्सनल लॉ पर हमला किया जा रहा है। हमें अपने लोगों और देशवासियों को बताना पड़ रहा है कि देश के साथ-साथ इस्लाम पर भी खतरा है।’

कुछ भी हो जाए, नहीं बदलेगी शरीयत

रैली को संबोधित करते हुए मौलाना मसूद रहमानी ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, ‘सरकार समझ ले कि हुकूमत बदलेगी, जमाना बदलेगा लेकिन शरीयत नही बदलेगी।’ उन्होंने कहा कि काला धन तो आया नहीं, सफेद धन बाहर जा रहा है। 15-15 लाख एकाउंट में नहीं आए और जो पैसा था वो भी निकाल लिया। तीन तलाक और हलाला का मुद्दा उठाकर मुख्य मुद्दे से भटकाया जा रहा है।

कौन-कौन हुए सम्‍मेलन में शामिल ?

इस सम्‍मेलन को इमारत-ए-शरिया के अमिरते शरीयत मौलाना वली रहमानी, लखनऊ के मौलाना कल्‍बे सादिक, मौलाना उमेर रहमानी, पूर्व सांसद मौलाना उबैदुल्लाह खान आजमी, मौलाना अबू सालीम रहमानी, बोमेन मिसरामजी, मौलाना असगर इमाम सल्फी, मौलाना आमरीन रहमानी समेत मुस्लिम जगत के कई बड़े नेताओं ने संबोधित किया।

सम्‍मेलन से पहले पढ़ी नमाज

‘दीन बचाओ देश बचाओ’ सम्मेलन में भाग लेने के लिए बिहार समेत देश के कोने-कोने से लोग सुबह से ही गांधी मैदान पहुंचने लगे थे। देशभर से बड़ी तादाद में मुसलमानों ने सम्‍मेलन में शिरकत की। इसी बीच सम्मलेन शुरू होने के आधे घंटे पहले करीब 12.30 बजे मुसलमानों ने गांधी मैदान में ही जोहर की नमाज पढ़ी। आयोजकों ने दावा किया कि रैली पूरी तरह गैर राजनीतिक थी।

सुरक्षा के थे कड़े इंतजाम

शासन-प्रशासन ने सम्‍मेलन को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। 300 मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई। इसके अलावा 4,000 पुलिस जवानों को लगाया गया था। गांधी मैदान समेत पटना के प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। चप्पे-चप्पे पर पुलिस के साथ बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए थे। कार्यक्रम से राजनीतिक पार्टियों को दूर रखा गया था।

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