IIT दिल्ली कैंपस में शराब और सिगरेट पर लगा पूरी तरह प्रतिबंध

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  • छात्रों से जुलाई से कराया जाएगा एक अंडरटेकिंग पर साइन, हो सकता है निष्‍कासन भी
  • आईआईटी प्रशासन के आदेश के खिलाफ फूटा छात्रों का गुस्सा, बताया मोरल पुलिसिंग

नई दिल्ली। भारतीय प्रोद्यौगिकी संस्थान (IIT), दिल्ली के कैंपस में शराब और सिगरेट पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। दरअसल, ये नियम अभी तक नियम पुस्तिका का ही हिस्सा थे, लेकिन मादक पदार्थों के बढ़ते सेवन को देखते हुए आईआईटी प्रशासन ने सख्‍त रुख अपनाया है। इस प्रतिबंध के बाद छात्रों में आक्रोश है। उनका कहना है कि यह फैसला मोरल पुलिसिंग जैसा है। बता दें कि हाल ही में नेशनल इंस्टीट्यूशन रैंकिंग में दिल्ली आईआईटी तीसरे पायदान पर रही है।

छात्रों को देनी होगी अंडरटेकिंग

दरअसल देश के शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थान आईआईटी में छात्रों से इस साल जुलाई से एक अंडरटेकिंग पर साइन कराया जाएगा, जिसमें लिखा है कि वो कैंपस के भीतर शराब-सिगरेट या अन्‍य मादक पदार्थों का इस्‍तेमाल नहीं करेंगे। इसमें ये भी लिखा है कि अगर वो ऐसा करते हुए पकड़े जाते हैं तो उन्हें संस्‍थान से निष्कासित भी किया जा सकता है। आईआईटी प्रशासन के अनुसार, छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के बाद ही ये फैसला लिया गया है।

क्‍या बोले संस्‍थान के डीन ?

डीन (DSW) टी श्रीकृष्णन ने कहा, पहले भी कैंपस में शराब और तम्बाकू के सेवन की इजाजत नहीं थी और अगर छात्र इनका सेवन करते पाए जाते थे तो उन्‍हें दंडित किया जाता था। इसकी शिकायत उनके पेरेंट्स से भी की जाती थी, लेकिन वे खुद को इस मामले में असहाय बताते थे। डीन ने कहा, अब हम चाहते हैं कि एडमिशन के समय ही छात्रों को इसके प्रति सचेत कर दिया जाए, इसीलिए उनसे अंडरटेकिंग पर दस्‍तखत कराए जा रहे हैं। छात्रों में जागरूकता पैदा करने के लिए पुलिस की मदद भी ली जा रही है।

पकड़े जाने पर क्‍या होगा ?

डीन ने बताया, ‘जुलाई से शुरू हो रहे नए बैच के छात्रों को अंडरटेकिंग पर हस्‍ताक्षर करना होगा। वर्तमान छात्रों को भी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा जा रहा है। इसके तहत नियम का उल्‍लंघन करते पाए जाने पर छात्रों पर निर्धारित जुर्माना लगाया जाएगा। उन्‍हें संस्थान से निकाला भी जा सकता है। हालांकि डीन ने ये भी कहा कि चूंकि इसे पहली बार लागू किया जा रहा है, इसलिए अबकी नियमों का उल्‍लंघन करने पर छात्रों को कड़ा दंड न देकर उन्‍हें कुछ गतिविधियों में शामिल होने से रोका जा सकता है।

फैसले के विरोध में उतरे छात्र

आईआईटी प्रशासन के इस फैसले का छात्र विरोध कर रहे हैं। पोस्ट ग्रेजुएशन और रिसर्च कर रहे छात्र विशेष तौर पर इस फैसले के खिलाफ खड़े हो गए हैं। उनका कहना है कि हम इस फैसले के खिलाफ नहीं हैं, क्योंकि ये उन छात्रों के हित में है जो अभी 20 साल के शुरुआती दौर में हैं, लेकिन ये फैसला उन छात्रों पर क्यों थोपा जा रहा है जो 25 साल से ऊपर हैं ?

बॉम्‍बे आईआईटी ने भी लिया था ऐसा फैसला

उल्‍लखनीय है कि करीब दो महीने पहले आईआईटी बॉम्बे ने भी इसी तरह का एक निर्णय लिया था। इस फैसले में कहा गया था कि कैफेटेरिया में मीट और अंडे नहीं बनेंगे। हालांकि छात्रों के विरोध के बाद संस्थान को अपना ये फैसला वापस लेना पड़ा था।

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