सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ रहा महिलाओं का ‘ग्रीन गैंग’

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  • मिर्जापुर में गैंग की महिलाएं गांव-गांव जाकर नशा करने वालों के खिलाफ चलाती हैं मुहिम
  • महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वच्छता के लिए चला रहीं जागरूकता अभियान भी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिला मिर्जापुर में महिलाओं ने ‘ग्रीन गैंग’ बनाया है। इस गैंग की महिलाएं समाज में फैली विभिन्‍न बुराइयों से लड़ रही हैं और उनके खिलाफ अभियान चला रही हैं। यह संगठन महिला प्रताड़ना के खिलाफ कदम उठाने के साथ ही महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, स्वच्छता मुहिम, शराबबंदी, नशाबंदी के लिए जनजागरूकता अभियान भी चला रहा है।

ग्रीन कलर की साड़ी है ड्रेसकोड

ग्रीन गैंग की इन महिलाओं का ड्रेसकोड ग्रीन कलर की साड़ी है। इस गैंग में लगभग 25 महिलाएं शामिल है। वास्‍तव में ग्रीन गैंग का लक्ष्य है लोगों में जागरूकता फैलाना। इस गैंग की महिलाएं अहिंसक तरीके से घरेलू हिंसा के खिलाफ खड़ी होती है।

सामाजिक बुराइयों को खत्म करने के लिए शपथ लेतीं ग्रीन गैंग की सदस्य

ली है जूडो-कराटे की ट्रेनिंग

खुद की आत्मरक्षा करने के लिए इन महिलाओं ने जूडो-कराटे की ट्रेनिंग भी ली है। ये महिलाएं गांव-गांव जाकर नशा करने वालों के खिलाफ मुहिम चलाती हैं। ग्रीन गैंग की महिलाओं को देखकर शराबी और नशेड़ी भाग जाते हैं। यही नहीं, इन महिलाओं ने मतदान के लिए लोगों को जागरूक भी किया।

कैसे हुई ग्रीन गैंग की शुरुआत ?

कन्नौज जिले के तिर्वा कस्बे में रहने वाली अंगूरी दहाड़िया इस ‘ग्रीन गैंग’ की मुखिया हैं। वह वर्ष 2010 से इस संगठन को चला रही है। अंगूरी बताती हैं कि उनकी शादी अत्‍यंत गरीब परिवार में हुई थी। पति बीमार रहते थे। घर चलाने के लिए उन्‍होंने छोटा-मोटा काम शुरू किया। उन्‍होंने किश्तों में प्‍लॉट के लिए भूमि मालिक के पास पैसा जमा किया, लेकिन उसने प्‍लॉट नहीं दिया। उन्‍होंने कई जगह गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद अंगूरी ने एक महिला गैंग तैयार किया जिसका नाम रखा ‘ग्रीन गैंग’। हालांकि इस संगठन को तैयार करने में उनको काफी मुश्किलें उठानी पड़ीं। आज यह संगठन उत्तर प्रदेश के 13 जिलों में चल रहा है और इससे वर्तमान समय में 14 हजार 252 महिलाएं जुड़ी हैं।

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