ताजमहल का वारिस आया सामने, बोला – शाहजहां ने अपने दस्तखत से दिया

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नई दिल्ली। अब तक सबको पता था कि आगरा का ताजमहल केंद्र सरकार के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI के पास है, लेकिन अब एक संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया है कि ताजमहल उसका है और बाकायदा मुगल बादशाह शाहजहां ने अपने दस्तखत से संगठन को ताजमहल का वारिस बनाया था।

किसने किया ताजमहल का वारिस होने का दावा ?
ताजमहल पर मालिकाना हक जताने वाला संगठन है सुन्नी वक्फ बोर्ड। मंगलवार को सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि मुगल बादशाह शाहजहां ने खुद अपने दस्तखत से बोर्ड को ताजमहल का वारिस बनाया था।

बोर्ड के दावे पर कोर्ट ने क्या कहा ?
सुन्नी वक्फ बोर्ड के इस दावे पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि देश में कौन मानेगा कि ताजमहल वक्फ बोर्ड का है ? उन्होंने कहा कि मुगलों का दौर खत्म होने पर ताजमहल समेत अन्य ऐतिहासिक इमारतें अंग्रेजों को मिल गई थीं। आजादी के बाद से ताजमहल सरकार के पास है और एएसआई इसकी देखभाल करता है।

वक्फ बोर्ड से मांगे दस्तावेज
चीफ जस्टिस के ये कहने पर भी बोर्ड की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट वीवी गिरी ने कहा कि शाहजहां ने सुन्नी वक्फ बोर्ड के पक्ष में वक्फनामा तैयार कराया था। इस पर कोर्ट ने कहा कि शाहजहां के दस्तखत वाले दस्तावेज कोर्ट में पेश किए जाएं। गिरी ने इस पर एक हफ्ते का वक्त मांगा, जिसकी मोहलत मिल गई।

शाहजहां ने दस्तखत कैसे किए ?
चीफ जस्टिस ने इसके साथ ही वक्फ बोर्ड के वकील से ये भी जानना चाहा कि जब शाहजहां को उसके बेटे औरंगजेब ने कैद कर लिया था, तो कैद में उन्होंने दस्तावेज पर दस्तखत कैसे किए थे।

कैद में मर गए थे शाहजहां
शाहजहां के बेटों में विरासत की जंग छिड़ गई थी। इसके बाद औरंगजेब ने जुलाई 1658 में शाहजहां को कैद कर आगरा किले के मुसम्मन बुर्ज में नजरबंद कर दिया था। ताजमहल बनवाने के 18 साल बाद 1666 में शाहजहां की मौत आगरा के किले में ही हुई थी।

मुगलों की संपत्तियां अंग्रेजों को मिली थीं
बता दें कि 1857 की क्रांति के खत्म होने के बाद 1858 में तत्कालीन ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया ने एक घोषणा की थी। उस घोषणा के मुताबिक, आखिरी मुगल बादशाह रहे बहादुर शाह जफर से ली गई संपत्तियों की मालकिन ब्रिटिश महारानी हो गईं थीं। 1948 में बने कानून के तहत सारी ऐतिहासिक इमारतें अब भारत सरकार के पास हैं।

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