IIT में खोजी गई स्तन कैंसर की नई जांच तकनीकी, महिलाओं को नहीं होगा दर्द

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रोपड़। भारत में हर साल 25 से 50 साल की करीब 1 लाख महिलाओं में स्तन कैंसर का पता चलता है। शुरुआत में बीमारी पकड़ में न आने की वजह से इसका इलाज नहीं हो पाता। आशंका ये भी जताई जा चुकी है कि साल 2020 तक हर साल करीब 76 हजार महिलाओं की मौत स्तन कैंसर से हो सकती है। ऐसे में पंजाब के रोपड़ की आईआईटी के शोधकर्ताओं की नई तकनीकी स्तन कैंसर पीड़ित महिलाओं के लिए वरदान की तरह आई है।

क्या है स्तन कैंसर जांच की नई तकनीकी
आईआईटी रोपड़ ने ऐसी तकनीकी विकसित करने का दावा किया है, जिससे महिलाओं में स्तन कैंसर की जांच तेजी से हो सकेगी। इस जांच के दौरान दर्द भी नहीं होगा और स्तन को छुए बगैर जांच हो सकेगी। स्तन कैंसर की जांच की नई तकनीकी का इस्तेमाल प्रेग्नेंट या बच्चे को जन्म देने के तुरंत बाद भी किसी महिला में की जा सकेगी।

किस तरह की जाएगी जांच ?
शोधकर्ताओं के दल में शामिल इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के असोसिएट प्रोफेसर रविबाबू मुलाविसला ने बताया कि आईआईटी रोपड़ में विकसित नई तकनीकी में स्तन से निकलने वाली इन्फ्रारेड किरणों के जरिए छिपे ट्यूमरों की पहचान की जाएगी। इस तकनीकी को इन्फ्रारेड थर्मोग्राफी कहते हैं। इसमें ट्यूमर के भीतर से भी बायप्सी के लिए सैंपल लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। फिलहाल स्तन कैंसर की जांच के लिए मैमोग्राफी, अल्ट्रासाउंड और एमआरआई तकनीकी का इस्तेमाल किया जाता है।

इन्फ्रारेड से कैसे कैंसर का पता चलेगा ?
इन्फ्रारेड थर्मोग्राफी में एक यंत्र स्तन के पास रखा जाएगा। हर शरीर से गर्मी निकलती है, जो शरीर के अलग-अलग अंगों में अलग-अलग होती है। स्तन में ट्यूमर होने पर उस हिस्से का तापमान स्तन के बाकी हिस्से से अलग दिखेगा। तापमान में इस बदलाव के आधार पर पता लगाया जा सकेगा कि महिला को स्तन कैंसर है या नहीं।

पुरानी तकनीकी में क्या है दिक्कत ?
बता दें कि अभी तक स्तन कैंसर की जांच के लिए मैमोग्राफी की जाती है, लेकिन बड़े स्तनों में ट्यूमर की पहचान अमूमन मैमोग्राफी मशीन नहीं कर पाती। ऐसे स्तनों में कम फैट होता है और ग्लैंड टिश्यू की संख्या ज्यादा होती है, जबकि जिन स्तनों में फैट ज्यादा होता है, उनमें भी ट्यूमर का पता आसानी से नहीं चलता है। इन मामलों में मैमोग्राफी मशीन से ये पता नहीं चलता कि स्तन में कहां ट्यूमर है।

मैमोग्राफी से मरीज को होती है दिक्कत
मैमोग्राफी से मरीज को काफी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ता है। स्तन में ट्यूमर का पता न चलने पर कई बार जांच करनी होती है। साथ ही शरीर में रेडिएशन भी ज्यादा जाता है।

शहरों में स्तन कैंसर के होते हैं कितने मामले ?
एक सर्वे के मुताबिक दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, भोपाल और अहमदाबाद समेत कई शहरों में महिलाओं को होने वाले कैंसर के कुल मामलों में से 25 से 32 फीसदी स्तन कैंसर के होते हैं। ऐसे में आईआईटी रोपड़ में ईजाद हुई नई तकनीकी महिलाओं के लिए वरदान के समान मानी जा रही है।

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