बर्थडे स्पेशल : गुड्डी से लेकर सांसद बनने तक का जया का सफर

167 0

मुंबई। बॉलीवुड की सबसे गंभीर और संजीदा अभिनेत्रियों में से एक जया बच्चन का आज (9 अप्रैल) जन्मदिन है। जया बच्चन ने फिल्मों की तरफ उस समय रुख किया था, जब लोगों के दिलों पर शर्मिला टैगोर, मुमताज और हेमा मालिनी जैसी अभिनेत्रियों का कब्जा था। जया की मासूमियत और उनकी सादगी की वजह से ही वो हिंदी सिनेमा में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहीं और लोगों के दिलों में आज भी उन्होंने अपनी एक गहरी छाप छोड़ रखी है।

15 साल की उम्र में की पहली फिल्‍म

जया भादुड़ी का जन्म जबलपुर में 9 अप्रैल, 1950 को हुआ। मशहूर पत्रकार तरुण कुमार भादुड़ी उनके पिता थे। पुणे स्थित फिल्म इंस्टीट्यूट से एक्टिंग का डिप्लोमा करने के बाद जया भादुड़ी ने एक्टिंग में अपना कॅरियर बनाने की ठान ली। जब वह 15 साल की थीं, तो साल 1963 में प्रख्यात फिल्मकार सत्यजीत रे ने उन्हें अपनी बंगाली फिल्म ‘महानगर’ में छोटा सा रोल दे दिया, मगर रे की प्रतिष्ठा भी जया के कॅरियर को आगे बढ़ाने में मददगार साबित नहीं हुई। इसके बाद बंगाली अभिनेता उत्तम कुमार ने उन्हें ‘धान्यी मेये’ में एक बड़ा रोल दिया, लेकिन मामला ज्यों का त्यों रहा। जया भादुड़ी को हिंदी फिल्मों में अपना कॅरियर शुरू करने के लिए काफी लंबा सफ़र तय करना पड़ा।

जया ऐसे बनीं ‘गुड्डी’

हृषिकेश मुखर्जी उन दिनों फिल्म ‘गुड्डी’ के निर्माण की योजना बना रहे थे। मुखर्जी ने गुलज़ार को इसकी कहानी लिखने का जिम्मा सौंपा। उसी दरम्यान गुलज़ार ने किसी पार्टी में डिंपल को देखा और तय किया कि ‘गुड्डी’ के किरदार के लिए डिंपल से ज्यादा और कोई उपयुक्त नहीं हो सकता। एक अल्हड, शोख, ग्लैमर की दीवानी लड़की की भूमिका में 18 वर्षीय डिंपल खूब फब सकती थीं, लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंज़ूर था। डिम्पल ने फिल्म करने से मना कर दिया। इसी बीच मुखर्जी ने जया भादुड़ी को देखा तो ‘गुड्डी’ की योजना फिर से परवान चढ़ने लगी। उन्हें जब मालूम हुआ कि जया उनके पत्रकार मित्र तरुण भादुड़ी की बेटी हैं तो उन्होंने जया को ‘गुड्डी’ के रूप में फाइनल कर दिया। ‘गुड्डी’ फिल्म 1971 में प्रदर्शित हुई और अप्रत्‍याशित रूप से सफल रही। इस फिल्म ने जया के कॅरियर को परवान चढ़ा दिया।

जया भादुड़ी से जया बच्चन तक का सफ़र

इस फिल्म की सफलता के साथ ही जया भादुड़ी की गाडी चल पड़ी। ‘उपहार’, ‘अभिमान’ जैसी फिल्मों ने उन्हें बुलंदी पर पहुंचा दिया। इसी बीच अमिताभ के साथ उनका रोमांस शुरू हुआ, जिसकी परिणति 1973 में उनकी शादी के रूप में हुई। इस तरह वो जया भादुड़ी से जया बच्चन बन गईं। काफी समय तक सिल्‍वर स्‍क्रीन से दूर रहने के बाद 1981 में जया बच्चन ने अमिताभ और रेखा के साथ ‘सिलसिला’ फिल्‍म की। हालांकि इस फिल्‍म के बाद जया ने फिल्मों से दूरी बना ली।

‘सिलसिला’ के 17 साल बाद शुरू की दूसरी पारी

फिल्म ‘सिलसिला’ रिलीज होने के 17 साल बाद वह ‘हजार चौरासी की मां’ फिल्‍म में नजर आईं। यह एक तरह से बॉलीवुड में उनकी दूसरी पारी थी। इसके बाद जया ने ‘फिजा’, ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘कोई मेरे दिल से पूछे’, ‘द्रोण’ और ‘लागा चुनरी में दाग’ जैसी फिल्‍मों में अपने अभिनय का सिक्का जमाया। अपने 40 साल के कॅरियर में जया ने लगभग 50 फिल्में कीं। वह1971 से लेकर 1981 तक सबसे ज्यादा सक्रिय रहीं। जया ऑफबीट फिल्म बनाने वाले निर्देशकों की पसंदीदा नायिका थीं। ‘परिचय’, ‘शोर’, ‘कोशिश’, ‘अनामिका’, ‘कोरा कागज’, ‘मिली’, ‘चुपके चुपके’ जैसी फिल्मों में जया ने दिखाया कि वह अलग तरह की अभिनेत्री हैं।

वर्ष 2004 में आईं राजनीति में

साल 2004 में जया बच्चन ने समाज सेवा के लिए समाजवादी पार्टी में शामिल होकर राजनीति में कदम रखा। सपा ने उन्‍हें राज्‍यसभा सदस्‍य बनवाया। अभी पिछले महीने हुए राज्‍यसभा चुनाव में जया बच्‍चन दोबारा समाजवादी पार्टी की ओर सेराज्यसभा सदस्य चुनी गई हैं। जया बच्‍चन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से सटे जिले भदोही के एक गांव लागनबारी को गोद लिया है और उसके विकास में जुटी हैं।

Related Post

मोटोरोला ने लांच किये अपने 3 नए स्मार्टफोन, जानिए क्या है इसमें ख़ास…

Posted by - April 20, 2018 0
नई दिल्‍ली। मोबाइल कंपनी मोटोरोला ने शुक्रवार (20 अप्रैल) को अपने तीन नए हैण्डसेट बाजार में उतारे हैं। ये हैं – मोटो…

जानिए, किसकी मौत पर फफक-फफक कर रोये धर्मेंद्र-ऋषि

Posted by - May 7, 2018 0
मुंबई। बॉलीवुड के मशहूर प्रोड्यूसर और डायरेक्टर अर्जुन हिंगोरानी ने (92 साल) शनिवार (5 मई) को  दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *