गाजियाबाद में बेखौफ बदमाशों ने टीवी पत्रकार को घर में घुसकर मारी गोली

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  • गंभीर हालत में अस्‍पताल में भर्ती, पुलिस ने आपसी रंजिश में गोली मारने की जताई आशंका

गाजियाबाद। दिल्ली से सटे गाजियाबाद में पुलिस को चुनौती देते हुए बेखौफ बदमाशों ने एक टीवी पत्रकार अनुज चौधरी को गोली मार दी। उनको गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस को शक है कि आपसी रंजिश के चलते यह वारदात हुई है।

पुलिस की ओर से मिला है गनर

जिले के थाना कविनगर के रजापुर गांव में पत्रकार अनुज चौधरी अपने परिवार के साथ रहते हैं। वह एक टीवी न्‍यूज चैनल में काम करते हैं। उनकी पत्नी बसपा की पार्षद हैं। बताया जा रहा है कि अनुज को पुलिस से गनर भी मिला हुआ है। गांव में उनकी किसी से रंजिश की बात भी सामने आई है। रविवार की शाम अज्ञात बदमाशों ने घर में घुसकर अनुज पर गोलियां चलाईं और फरार हो गए। उन्‍हें पेट और हाथ में गोलियां लगी हैं। अनुज को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पत्रकारों पर हमले की घटनाएं बढ़ीं

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में पत्रकारों के खिलाफ हिंसा के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। बिहार के भोजपुर में बीते मार्च के आखिरी सप्ताह में दो पत्रकारों नवीन निश्चल और उनके साथी विजय सिंह की स्‍कॉर्पियो से कुचल कर हत्या कर दी गई थी। मार्च 2018 में ही मध्य प्रदेश के भिंड में बाइक से जा रहे एक पत्रकार को डंपर ने कुचल दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। अभी कुछ ही दिन पहले कानपुर के बिल्हौर में भी अज्ञात बाइक सवार बदमाशों ने पत्रकार नवीन की गोली मारकर हत्या कर दी थी। सितंबर 2017 में चर्चित कन्नड़ सप्ताहिक ‘लंकेश पत्रिके’ की संपादक गौरी लंकेश की बेंगलुरू स्थित उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना की देशभर में निंदा हुई थी।

दो वर्षों में पत्रकारों पर हमले के 142 मामले दर्ज

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, 2014 और 2015 दो वर्षों में देशभर में पत्रकारों पर 142 गंभीर हमले के मामले दर्ज हुए हैं। 2014 में 114 और 2015 में 28 मामले दर्ज किए गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए हैं। उत्तर प्रदेश में दो साल में 64 मामले दर्ज किए। इसके बाद बाद मध्य प्रदेश का नंबर है, जहां 26 मामले दर्ज हुए। बिहार में पत्रकारों पर हमले के 22 मामले दर्ज हुए हैं। देशभर में हुए पत्रकारों पर हमलों में से 79 फीसदी हमले इन्‍हीं तीन राज्‍यों में हुए।

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