अयोध्या मामला संविधान पीठ को सौंपने से फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का इनकार

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  • मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा, बहुविवाह से ज्यादा अहम है यह मामला
  • सर्वोच्‍च अदालत ने कहा – सभी संबं‍धित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही इस पर फैसला
  • अदालत में दोनों पक्षों के वकीलों के बीच हुई तीखी बहस, अगली सुनवाई 27 अप्रैल को

नई दिल्ली। अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार (6 अप्रैल) को सुनवाई हुई। मुस्लिम पक्ष की ओर से यह मामला संवैधानिक पीठ को भेजने की मांग की गई। इस पर सर्वोच्‍च अदालत ने कहा कि आप संतुष्ट करें कि यह केस संविधान पीठ को क्यों भेजा जाए? इस दौरान मुस्लिम और हिंदू पक्ष की ओर से पेश वकीलों के बीच तीखी बहस हुई। मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होगी।

पहले सभी पक्षों की दलीलें सुनेंगे

सुप्रीमकोर्ट ने अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले को तत्काल संविधान पीठ को सौंपने का सुन्नी वक्फ बोर्ड व कुछ अन्य अपीलकर्ताओं के अनुरोध को ठुकरा दिया है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण व जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर की विशेष पीठ ने वक्फ बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन की दलीलें सुनने के बाद कहा कि वह इस मामले के सुन्नी वक्फ बोर्ड एवं उत्तर प्रदेश सरकार सहित सभी संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही यह फैसला करेगी कि इसे संविधान पीठ को सौंपा जाए या नहीं।

बहुविवाह से महत्‍वपूर्ण मामला : धवन

मुस्लिम पक्ष की तरफ से पेश हुए वकील राजीव धवन ने सवाल उठाया कि अगर मुसलमानों के बहुविवाह का मामला संवैधनिक पीठ के पास भेजा जा सकता है तो ये क्यों नहीं? राजीव धवन ने कहा कि बहुविवाह से ज्यादा महत्वपूर्ण यह मामला है कि मस्जिद में नमाज़ अदा करना इस्लाम का मूल हिस्सा है या नहीं।

मीडिया को बीच में लाने पर सवाल

उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से वकील तुषार मेहता ने मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन पर सवाल उठाते हुए कहा कि आप बार-बार मीडिया को बीच में क्यों ला रहे हैं ? इससे संस्थान कमजोर होता है, संस्थान को धक्का पहुंचता है। दरअसल मुस्लिम पक्ष की तरफ से बहस कर रहे राजीव धवन ने कहा था कि मीडिया कोर्ट रूम में मौजूद है। कोर्ट क्यों नहीं कह देता कि बहुविवाह का मामला इस मामले से ज्यादा जरूरी है।

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