जानिए, कर्नाटक चुनावों से पहले मठों-मंदिरों के चक्कर क्यों काट रहे राहुल और शाह

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बेंगलुरू। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के बीच आजकल अनोखी जंग छिड़ी हुई है। ये जंग है कर्नाटक में मठों और मंदिरों में जाकर माथा टेकने की। दरअसल, राहुल और शाह की ये सारी जंग उन वोटों की खातिर है, जिन्हें मठ, मंदिर और संत कंट्रोल करते हैं। आपको आज बताते हैं कि कर्नाटक की राजनीति में मठ, मंदिर और संतों का क्या प्रभाव है।

कर्नाटक में 600 से ज्यादा मठ

कर्नाटक में 600 से ज्यादा मठ हैं। इनमें लिंगायतों के 400, वोक्कालिगा के 150 और कुरबा समुदाय के 80 से ज्यादा मठ हैं। ये सारे मठ कर्नाटक के 30 जिलों में फैले हुए हैं।

अलग-अलग समुदाय के कितने वोटर ?
कर्नाटक में लिंगायत, वोक्कालिगा और कुरबा समुदाय के करीब 38 फीसदी वोटर हैं। जाहिर है, जिनके पक्ष में इनके वोट गए, उसने सरकार आसानी से बना ली। इनमें से लिंगायत वोटरों की संख्या करीब 17 से 18 फीसदी है। करीब 100 सीटें लिंगायत बहुल हैं। लिंगायतों को बीजेपी का पारंपरिक वोटर माना जाता है, लेकिन सिद्धारमैया सरकार ने लिंगायतों को अल्पसंख्यक का दर्जा देकर बीजेपी को बड़ा झटका दिया है।

वोक्कालिगा और कुरबा भी हैं असरदार

कर्नाटक में 12 फीसदी वोक्कालिगा हैं। करीब 80 विधानसभा सीटों पर इनका असर है। इस समुदाय से छह सीएम हो चुके हैं। वहीं, कुरबा समुदाय की आबादी करीब 8 फीसदी है। मौजूदा सीएम सिद्धारमैया इसी समुदाय से हैं।

हिंदू और मुस्लिम वोटर

कर्नाटक में 85 फीसदी हिंदू और 13 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। ये करीब 200 सीटों पर असरदार हैं। सिद्धारमैया के लिंगायत कार्ड खेलने के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह हिंदू वोटों के अलावा वोक्कालिगा और कुरबा वोटों के जरिए कर्नाटक में बाजी मारने की फिराक में लगे हैं।

राहुल और शाह ने कहां-कहां टेका माथा ?

अमित शाह जहां पांच बार से ज्यादा मंदिरों और मठों में जा चुके हैं, वहीं राहुल गांधी अब तक 15 बार ऐसी जगहों का दौरा कर चुके हैं।

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