हो जाएं सावधान, पुराने गंदे नोटो से हो सकती है जानलेवा बीमारी

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हो जाएं सावधान, पुराने गंदे नोट और सिक्के आपके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। जी हां, सही सुना आपने गंदे नोट्स और सिक्के आपको बीमार कर सकते हैं। देश की सबसे बड़ी खाद्य नियामक संस्था ने इसकी ओर संकेत किया है।

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSSAI) ने सभी राज्यों के खाद्य आयुक्त को इस बारे में एक जागरूकता अभियान शुरू करने के लिए कहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस बारे में सचेत किया जा सके। साथ ही, उन्हें फूड और करेंसी की हैंडलिंग के बारे में समझाया जा सके।

एजेंसी ने ये भी बताया है कि होटल-रेस्तरां और वेंडर्स को कैश लेने और फूड सर्व करने के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत है। एफएसएसएआई ने अपनी एडवायजरी में कहा है, ‘अस्वच्छ परिस्थितियों में गंदे और भीगे हाथों से, थूक लगाकर करेंसी को गिनना और संग्रह करना व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।’

खाद्य एजेंसी ने कहा है कि एक से दूसरे हाथों में आ-जा रही करेंसी से व्यक्ति के स्वास्थ्य को काफी खतरा हो सकता है। इससे स्किन, सांस संबंधी और पेट संबंधी बीमारियां हो सकती हैं। बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र वाले व्यक्ति इस तरह की बीमारियों के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। फूड वेंडर्स, इनमें भी खासतौर पर सड़क किनारे ठेले पर खाद्य सामग्री बेचने वाले, जो अक्सर खाना बनाने और परोसने के दौरान ही उसी हाथ से पैसा भी इकट्ठा करते हैं, उनके जरिए बीमारियां फैलने का खतरा ज्‍यादा होता है।

एजेंसी का कहना है कि करेंसी नोट्स और सिक्के हर रोज सैकड़ों लोगों के हाथों से गुजरते हैं, यही वजह है कि ये माइक्रोबॉयोलॉजिकल कीटाणुओं के संपर्क में आ जाते हैं। एफएसएसएआई के सीईओ पवन अग्रवाल ने बताया कि हम इस बारे में लंबे समय से अध्ययन कर रहे थे, लेकिन हम किसी को दंड नहीं दे सकते। लिहाजा हमने सभी राज्यों के खाद्य आयुक्तों को इस बारे में अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है।

उन्होंने कहा कि आदर्श स्थिति ये है कि करेंसी और फूड को अलग-अलग व्यक्ति डील करें। रुपये-पैसों का काम करने के बाद हाथों को साबुन से साफ कर लेना चाहिए। इस संबंध में तीन शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं। पहला ‘जर्नल ऑफ करेंट माइक्रोबॉयोलॉजी और अप्लाइड साइंसेस’ में, दूसरा ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ फॉर्मा एंड बॉयो साइंसेस’ में और तीसरा ‘इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एडवांस रिसर्च’ में छपा है। अध्ययन के लिए इकट्ठा किए गए करेंसी नोट डॉक्टरों, बैंकरों, स्थानीय बाजारों, कसाइयों, छात्रों और गृहिणियों से लिए गए थे।

इन तीनों शोध पत्रों में कहा गया है कि करेंसी पर दवा निरोधक विषाणु होते हैं, जो समाज में बीमारियों के संक्रमण में मददगार होते हैं। इनसे मूत्र संबंधी और सांस संबंधी बीमारियों के साथ त्वचा संबंधी इंफेक्शंस, टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम, सेप्टीकेमिया और पेट संबंधी कई बीमारियां हो सकती हैं। ये सभी अध्ययन 2016 में किए गए हैं। तमिलनाडु के तिरूनेलवेली मेडिकल कॉलेज के डिपार्टमेंट ऑफ माइक्रोबॉयोलॉजी की ओर कराए गए अध्ययन के मुताबिक, गंदे करेंसी नोटों से ऐसी बीमारियां भी हो सकती हैं, जो मल में मौजूद रोगाणुओं के चलते होती हैं।

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