AUTISM: ज्यादा शोर से बच्चों में दो गुना हो जाता है इस बीमारी का खतरा

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नई दिल्ली। ऑटिज्म दिमाग की एक गंभीर बीमारी है। आम तौर पर ये बच्चों में देखी जाती है। इस बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल 2 अप्रैल को वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे मनाया जाता है। आइए, जानते हैं कि अपने बच्चों को इस गंभीर बीमारी से बचाने के लिए क्या करें।

ऑटिज्म से बचाव के तरीके

  • शोर-शराबे वाली जगह से दूर रहें। ज्यादा शोर से बच्चों में ऑटिज्म का खतरा बढ़ जाता है।
  • इस बीमारी के लक्षण 1 से 3 साल की उम्र के बच्चों में नजर आ जाते हैं।
  • ऑटिज्म के शिकार बच्चे खुद में खोए रहते हैं। वो किसी से घुलते-मिलने नहीं हैं और बात भी नहीं करते हैं।
  • गर्भावस्था के दौरान खानपान ठीक न होने पर भी जन्म के बाद बच्चे को ऑटिज्म हो सकता है।
  • सेंट्रल नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचने से भी ऑटिज्म का खतरा होता है।

भारत में कितने हैं ऑटिज्म से प्रभावित ?
भारत में 2017 में कराए गए एक सर्वे से पता चला कि करीब 10 लाख लोग ऑटिज्म से प्रभावित थे। यहां हर 68 में से 1 बच्चे को ऑटिज्म हो जाता है। 20 फीसदी ऑटिज्म के मामलों में जीन की गड़बड़ी बड़ी वजह होती है। 80 फीसदी मामलों में पर्यावरण से जुड़े कारण ऑटिज्म की वजह बनते हैं।

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