अप्रैल फूल डे : आइए जानें, आखिर क्यों इस दिन बनाते हैं सबको मूर्ख

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लखनऊ। पहली अप्रैल नजदीक आते ही लोग अपने दोस्‍तों को मूर्ख बनाने के लिए तरह-तरह तरीके ढूंढने में जुट जाते हैं। कुछ लोग तो काफी पहले से इसके लिए योजनाएं तक बना लेते हैं। इस दिन लोग मजाक और शरारतें करके एक-दूसरे को मूर्ख बनाते हैं। हालांकि किसी को मूर्ख बनाने के पीछे उद्देश्‍य यही होता है कि लोगों के चेहरे पर थोड़ी मुस्कान आए। वैसे तो अप्रैल फूल डे पश्चिमी सभ्यता की देन है, लेकिन यह दुनिया के ज्‍यादातर देशों सहित भारत में भी मनाया जाता है।

आमतौर पर अगर हम किसी को बेवकूफ बनाएं तो वह बुरा मान जाता है, लेकिन 1 अप्रैल को मूर्ख बनने के बाद भी लोग इसका बुरा नहीं मानते हैं। सभी के मन में स्‍वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि आखिर ‘अप्रैल फूल डे’ यानी ‘मूर्ख दिवस’ की शुरुआत कैसे हुई ? वास्‍तव में इसको मनाने को लेकर कोई एक मान्‍यता नहीं है। इसके पीछे कई तरह की कहानियां और मान्‍यताएं हैं। आइए जानते हैं कि ‘अप्रैल फूल डे’ की शुरुआत को लेकर कौन-कौन सी कहानियां प्रचलित हैं –

चॉसर की कैंटरबरी टेल्स की एक कहानी

‘अप्रैल फूल’ मनाने को लेकर सर्वाधिक प्रचलित मान्यता ब्रिटेन के लेखक चॉसर की पुस्तक ‘द कैंटरबरी टेल्स’ की एक कहानी पर आधारित है। चॉसर की इस पुस्तक में एक कहानी है ‘नन्स प्रीस्ट्स टेल’, जिसमें कैंटरबरी का उल्लेख है। इस कहानी के अनुसार, 13वीं सदी में इंग्लैंड के राजा रिचर्ड सेकेंड और बोहेमिया की रानी एनी की सगाई 32 मार्च, 1381 को होने की घोषणा की जाती है। कैंटरबरी के लोग इस घोषणा को सही मान लेते हैं, लेकिन 32 मार्च तो होता ही नहीं है। इस प्रकार इस तिथि को सही मानकर वहां के लोग मूर्ख बन जाते हैं और तभी से 32 मार्च यानी एक अप्रैल को ‘मूर्ख दिवस’ अर्थात ‘अप्रैल फूल डे’ के रूप में मनाया जाने लगा।

कैलेंडर की भी है मान्‍यता

एक और कहानी के अनुसार, प्राचीन यूरोप में नया साल हर वर्ष 1 अप्रैल को मनाया जाता था। वर्ष 1582 में पोप ग्रेगरी XIII ने नया कैलेंडर अपनाने के निर्देश दिए, जिसमें नया साल 1 जनवरी से मनाने के लिए कहा गया। रोम के ज्यादातर लोगों ने इस नए कैलेंडर को अपना लिया, लेकिन कुछ लोगों ने इस कैलेंडर को अपनाने से इनकार कर दिया। वे लोग 1 अप्रैल को ही नया साल का पहला दिन मानते थे। तब ऐसे लोगो को मूर्ख समझकर उनका मजाक बनाया जाता था। ऐसा माना जाता है कि यूरोप में अप्रैल फूल तभी से मनाया जाता है।

इन देशों में ऐसे मनाते हैं ‘अप्रैल फूल’

  • फ्रांस, इटली, बेल्ज‍ियम में कागज की मछली बनाकर लोगों के पीछे चिपका दी जाती है और उनका मजाक बनाया जाता है।
  • स्पेनिश बोलने वाले देशों में 28 दिसंबर को अप्रैल फूल मनाया जाता है। इसे ‘डे ऑफ होली इनोसेंट्स’ कहा जाता है।
  • फारसी नववर्ष के 13वें दिन ईरान के लोग एक-दूसरे पर तंज कसते हैं, यह 1 या 2 अप्रैल का दिन होता है।
  • डेनमार्क में ‘अप्रैल फूल डे’ 1 मई को मनाया जाता है। इसे वहां ‘मज-कट’ कहते हैं।

‘अप्रैल फूल डे’ के कुछ मशहूर किस्से

1 अप्रैल, 1915 की बात है। इस दिन जर्मनी के हवाई अड्डे पर एक अंग्रेज अफसर ने काफी बड़ा सा बम फेंका। फिर क्‍या था, बम देखते ही लोग इधर-उधर भागने लगे। जब काफी देर हो जाने के बाद भी वो बम नहीं फटा तो लोग उसे देखने के लिए नजदीक पहुंचे। लोगों ने देखा कि वह बम नहीं बल्कि एक फुटबॉल था और उस पर ‘अप्रैल फूल’ लिखा हुआ था।

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1 अप्रैल, 1960 का एक किस्सा भी काफी मशहूर है। उस वक्त लंदन में किसी ने हजारों लोगो के घर में पोस्टकार्ड भेजा। पोस्‍टकार्ड में लिखा था – ‘आज शाम को ‘टावर ऑफ़ लंदन’ में सफ़ेद गधों का सम्‍मान किया जाएगा। आप सभी को ये कार्ड साथ लेकर आना है। लेकिन उस दिन किसी कारण से टावर ऑफ़ लंदन बंद था। शाम होते ही टावर के बाहर लोगों की काफी भीड़ जमा हो गई। लोग अंदर जाने के लिए बैचैन थे, तब उनको पता चला कि कोई उनको ‘अप्रैल फूल’ बनाकर चला गया था।

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ऐसा ही एक किस्सा है वर्ष 2013 का। 31 मार्च को यह अफवाह फैलाई गई कि 1 अप्रैल से यूट्यूब बंद हो जाएगा। साथ ही यह घोषणा भी की गई कि पिछले सालों में यूट्यूब पर अपलोड किए गए वीडियो में से सर्वश्रेष्ठ का चुनाव करने के लिए एक पैनल बनाया गया है, जो 2023 में परिणाम की घोषणा करेगा। इसके बाद फिर कई तरह की अफवाहें फैलने लगीं, लेकिन बाद में पता चला कि लोगों को ‘अप्रैल फूल’ बनाया गया था।

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