वैज्ञानिकों से ज्यादा ज्ञानी दिखे अमेरिकी जज, कहा- कॉफी से हो सकता है कैंसर

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लॉस एंजेलेस। वैज्ञानिक भले तमाम शोध के बाद कॉफी को स्वास्थ्य के लिए बेहतर बता चुके हों। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने कॉफी को 2016 में भले ही कैंसर पैदा करने वाले तत्वों की लिस्ट से हटा दिया हो, लेकिन अमेरिका के एक जज वैज्ञानिकों और विश्व स्वास्थ्य संगठन से बड़े जानकार लग रहे हैं। उन्होंने ‘बिग कॉफी’ नाम की कॉफी विक्रेता कंपनी को आदेश दिया है कि वो अपने प्रोडक्ट पर लेबल लगाए कि इससे कैंसर का खतरा हो सकता है। जज के इस फैसले के बाद ये सवाल उठ रहा है कि क्या वो वैज्ञानिकों से ज्यादा ज्ञानी हैं ?

क्या है मामला ?
ये मामला आठ साल पुराना है। अमेरिका के काउंसिल फॉर एजुकेशन एंड रिसर्च ने कॉफी बनाने वाली कंपनियों से कहा था कि वो इसमें इस्तेमाल होने वाले एक्रीलेमाइड नाम के रसायन को हटा दें। काउंसिल के मुताबिक ये रसायन आलू के चिप्स बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है और इसके लिए बाकायदा चिप्स बनाने वाली कंपनियों के खिलाफ काउंसिल ने मुकदमा भी किया था।

जज ने क्या कहा ?
इस मामले की सुनवाई कर रहे लॉस एंजेलेस सुपीरियर कोर्ट के जज लिहू बेरले ने बुधवार को कॉफी बनाने वाली कंपनियों को आदेश दिया कि वो अपने उत्पाद पर लेबल लगाकर बताएं कि कॉफी से कैंसर हो सकता है। हालांकि, बीते कई शोध से पता चला है कि कॉफी पीने से कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है।

क्या है अमेरिका में कानून ?
अमेरिका में ‘द सेफ ड्रिंकिंग वाटर एंड टॉक्सिक एनफोर्समेंट एक्ट’ है। इसे आमतौर पर प्रोपोजिशन-65 कहा जाता है। कानून के मुताबिक 900 ऐसे रसायनों की पहचान की गई है, जिनसे कैंसर हो सकता है या पैदा होने वाले बच्चों में अपंगता हो सकती है। कानून के तहत आम लोग, समूह या वकील राज्य की तरफ से ऐसी कंपनियों के खिलाफ मुकदमा लड़ सकते हैं, जो ऐसे रसायनों का इस्तेमाल अपने प्रोडक्ट में करते हैं।

कॉफी पीने से क्या होता है ?
वैज्ञानिकों ने तमाम शोध के बाद बताया है कि दिन में तीन से चार कप कॉफी पीने वालों को अकस्मात मौत का खतरा काफी कम हो जाता है। साथ ही इससे अल्जाइमर जैसी बीमारियां होने का खतरा भी कम हो जाता है। कॉफी पीने से किडनी से जुड़ी बीमारियां भी कम होनी पाई गई हैं। ब्लैक कॉफी पीने से शरीर से बैक्टीरिया और टॉक्सिन भी निकल जाते हैं।

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