अमेरिका ने 60 रूसी राजनयिकों को निकाला, सिएटल का दूतावास बंद

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  • जर्मनी, फ्रांस समेत पांच यूरोपियन देशों ने भी रूसी राजनयिकों को बाहर का रास्ता दिखाया

वॉशिंगटन। जासूस सर्गेई स्क्रिपल को जहर देने के मामले में रूस के खिलाफ अमेरिका समेत दुनिया के कई देश लामबंद हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जासूस पर केमिकल अटैक के मामले में सोमवार (26 मार्च) को 60 रूसी राजनयिकों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। ट्रंप प्रशासन ने सिएटल स्थित रूसी दूतावास को बंद करने का भी आदेश दिया है।

रूस पर पूर्व जासूस को जहर देने का आरोप

आरोप है कि ब्रिटेन में पूर्व जासूस को जहर देने के मामले में रूस का भी हाथ है। ट्रंप प्रशासन के सीनियर अधिकारी ने कहा कि सभी 60 रूसी नागरिक अमेरिका में डिप्लोमैटिक कवर के तहत जासूसी कर रहे थे। इनमें करीब एक दर्जन यूनाइटेड नेशन में रूस के मिशन पर तैनात थे। अधिकारी ने एक बयान में कहा कि ट्रंप प्रशासन सख्त कदम उठाकर रूस के नेताओं को संदेश देना चाहता है कि इस तरह के मामले स्वीकार नहीं किए जा सकते हैं।

रूस को सबक सिखाना उद्देश्‍य

उधर, पांच यूरोपियन देशों जर्मनी, पोलैंड, फ्रांस, यूक्रेन और लैटविया ने रूसी राजनयिकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। इस मामले में अन्य यूरोपीय देशों ने भी रूसी राजनयिकों पर कार्रवाई की बात कही है। अमेरिका और यूरोपियन देशों ने रूस को सबक सिखाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। गौरतलब है कि यूरोपीय यूनियन के नेता पिछले हफ़्ते ही इस बात पर सहमत हुए थे कि दक्षिणी इंग्लैंड में पूर्व रूसी जासूस सर्गेई स्क्रिपल और उनकी बेटी यूलिया पर नर्व एजेंट से हमले के पीछे रूस का हाथ था।

पुतिन ने आरोपों से किया इनकार

इससे पहले रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने ब्रिटेन और उसके सहयोगी देशों के इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया था कि चार मार्च को स्क्रिपल (66) और उनकी बेटी यूलिया (33) पर ब्रिटेन के सैलिसबरी में हुए केमिकल अटैक के पीछे रूस का हाथ है। बता दें कि रूस के सेवानिवृत सैन्य खुफिया अधिकारी स्क्रिपल को ब्रिटेन के लिए जासूसी करने के आरोप में रूस ने वर्ष 2006 में 13 वर्ष की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में उन्हें माफी मिल गई थी और ब्रिटेन ने उन्हें नागरिकता दे दी थी। वह तब से ब्रिटेन में ही रह रहे थे।

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