अगले महीने फिर यूपी में परखी जाएगी विधायकों की निष्ठा, विधान परिषद के हैं चुनाव

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लखनऊ। अंतरात्मा की आवाज सुनकर राज्यसभा चुनाव के दौरान बीजेपी उम्मीदवार को वोट देकर यूपी में तमाम विधायक चर्चा में रहे। अब यूपी के इन विधायकों की निष्ठा का फिर इम्तिहान होने जा रहा है। ये मौका आएगा अगले महीने मई में, जब विधान परिषद की खाली हो रही 13 सीटों के लिए चुनाव होंगे।

किनकी सदस्यता होगी खत्म ?
सपा से अखिलेश यादव, नरेश उत्तम, राजेंद्र चौधरी, मधु गुप्ता, रामसकल गुर्जर, उमर अली खान और विजय यादव की विधान परिषद सदस्यता खत्म होगी। वहीं, बीएसपी से सुनील कुमार चित्तौड़ और विजय प्रताप की सीटें भी खाली होंगी। आरएलडी से चौधरी मुश्ताक, बीजेपी से मोहसिन रजा और महेंद्र कुमार सिंह की सीटों पर भी चुनाव होगा, जबकि सपा से बीएसपी में गए अंबिका चौधरी की खाली सीट भी भरी जाएगी।

बीजेपी के 11 प्रत्याशी चुने जाने तय
विधानसभा में मौजूदा सदस्यों की संख्या 402 है। इस तरह विधान परिषद की एक सीट के लिए 29 वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में बीजेपी के 11 उम्मीदवार चुने जाने तय हैं। उसके पास इसके बाद 5 वोट बचेंगे। बीएसपी के समर्थन से सपा दो सीटें आसानी से जीत लेगी। कांग्रेस के 7 वोट भी जोड़ दें, तो विपक्ष के कुल वोटों की संख्या 71 होगी और सपा के दो सदस्यों को जिताने के बाद 13 वोट भी बचेंगे।

राज्यसभा वोटिंग से अलग कैसे ?
13 सीटों के लिए अगले महीने की शुरुआत में अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है। सारी सीटें 5 मई को खाली हो रही हैं। विधान परिषद चुनाव में विधायक अपना वोट राज्यसभा की तरह पोलिंग एजेंट को दिखाने के लिए बाध्य नहीं होते। ऐसे में क्रॉस वोटिंग ज्यादा होने की संभावना रहती है।

क्रॉस वोटिंग के कितने आसार ?
अपने 11 प्रत्याशी जिताने के बाद बीजेपी के पास 5 वोट बचेंगे। वहीं, सपा के दो प्रत्याशी जिताने के बाद विपक्ष के पास 13 वोट ही बचेंगे। दोनों को जोड़ दें तो कुल वोट 18 होते हैं, जबकि किसी उम्मीदवार को जिताने के लिए 29 वोट चाहिए। ऐसे में बीजेपी को 12वां उम्मीदवार जिताने के लिए 11 वोट और चाहिए, जबकि विपक्ष अगर तीसरा उम्मीदवार जिताना चाहता है, तो उसे 16 वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में बीजेपी और विपक्ष, दोनों के लिए ही मुश्किल होगी।

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