महाराष्ट्र सरकार ने 7 दिन में मार दिए 3 लाख चूहे, भाजपा विधायक ने ही उठाया सवाल

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  • निजी कंपनी को दिया गया था चूहे मारने का ठेका, भाजपा विधायक एकनाथ खड़से ने की जांच की मांग

मुंबई। महाराष्ट्र के वरिष्ठ भाजपा नेता एकनाथ खड़से ने एक बार फिर अपनी ही सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए चूहे मारने के टेंडर में घोटाले का आरोप लगाया है। वरिष्ठ भाजपा नेता ने विधानसभा में कहा कि मंत्रालय में एक सप्ताह में 3 लाख से ज्यादा चूहे मारे गए हैं, इसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। खडसे ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।

6 महीने में मारने थे, 7 दिन में निपटा दिए

खड़से के इन आरोपों के बाद सदन में हड़कंप मच गया। खड़से ने कहा कि बीएमसी दो साल में छह लाख चूहे मारती है और मंत्रालय ने मात्र 7 दिन में तीन लाख से ज्यादा चूहे मारने का कारनामा कर दिखाया है। साल 2016 में एक निजी संस्था को दिए ठेके की शर्तों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 6 महीने में मंत्रालय के चूहे खत्म करने थे, लेकिन यह काम महज 7 दिन में निपटा दिया गया। आखिर यह कारनामा कैसे हुआ, इसकी जांच होनी चाहिए।

गृह विभाग की अनुमति बगैर जहर कैसे आया ?

भाजपा नेता खड़से ने सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्रालय में गृह विभाग व सामान्य प्रशासन विभाग की अनुमति के बिना जहर कैसे मंगाया गया ? जिस संस्था को चूहा मारने का काम दिया गया था, उस संस्था को जहर खरीदने की अनुमति है क्या? मंत्रालय के जिस मंजिल पर या जिस विभाग में जहर रखा गया था, उस विभाग के प्रमुख से इसे रखने की अनुमति ली गई है? उन्‍होंने कहा कि उपलब्ध दस्तावेज में इन बातों का कोई जिक्र नहीं है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय में चूहे मारने के लिए लाई गई दवा को पीकर ही धर्मा पाटील नाम के किसान ने आत्महत्या की थी।

चूहों को ठिकाने कैसे लगाया ?

खड़से ने विधानसभा में एक आरटीआई का हवाला देते हुए कहा कि सरकार एक सप्ताह के भीतर 3 लाख 19 हजार चार सौ चूहे मारे जाने का दावा कर रही है। इसके हिसाबा से रोजाना नौ टन से ज्यादा चूहे मारे गए हैं तो आखिर उन्‍हें ठिकाने कैसे लगाया गया ? खड़से ने पूरे मामले की जांच की मांग की है। खड़से ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि चूहे मारने के टेंडर में घोटाले हुए हैं और जिन विभागों से यह टेंडर पास किया गया, वे सभी मुख्यमंत्री के अधीन चलने वाले सामान्य प्रशासन विभाग और गृहविभाग के अधीन हैं।

 

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