नवरात्रि का सातवां दिन : अकाल मृत्यु से बचाती हैं मां कालरात्रि

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आज (24 मार्च) चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन है। इस दिन महाशक्ति मां दुर्गा के सातवें स्वरूप कालरात्रि की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि मां के इस स्‍वरूप की पूजा करने से काल का नाश होता है, इसी वजह से मां के इस रूप को कालरात्रि कहा जाता है। असुरों के राजा रक्तबीज का वध करने के लिए देवी दुर्गा ने अपने तेज से इन्हें उत्पन्न किया था। इस दिन साधक का मन सहस्रार चक्र में स्थित रहता है. इसके लिए ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है। मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है, लेकिन ये सदैव शुभ फल देने वाली हैं। इसी कारण इनका एक नाम ‘शुभंकारी’ भी है।

मां कालरात्रि का रूप
देवी कालरात्रि का शरीर रात के अंधकार की तरह काला है। इनके बाल बिखरे हुए हैं और इनके गले में विद्युत की चमक वाली माला है। इनके चार हाथ हैं जिनमें इन्होंने एक हाथ में कटार तथा एक हाथ में लोहे कांटा धारण किया हुआ है। इसके अलावा इनके दो हाथ वरमुद्रा और अभय मुद्रा में हैं। मां कालरात्रि के तीन नेत्र हैं और इनके श्वास से अग्नि निकलती है। कालरात्रि का वाहन गर्दभ (गधा) है।

मां कालरात्रि की पूजा विधि

पूजा विधान में शास्त्रों में जैसा लिखा हुआ है उसके अनुसार पहले कलश की पूजा करनी चाहिए फिर नवग्रह, दशदिक्पाल, देवी के परिवार में उपस्थित देवी देवता की पूजा करनी चाहिए फिर मां कालरात्रि की पूजा करनी चाहिए। देवी की पूजा से पहले उनका ध्यान करना चाहिए। दुर्गा पूजा का सातवां दिन तांत्रिक क्रिया की साधना करने वाले भक्तों के लिए भी अति महत्वपूर्ण होता है।

मां कालरात्रि का मंत्र
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्टी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

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