7 साल बाद लोकपाल के लिए अन्ना हजारे फिर बैठे अनशन पर

34 0
  • कहा – अंग्रेज चले गए पर लोकतंत्र नहीं मिला है, गोरे गए और काले आ गए
  • सरकार पर आरोप – आंदोलनकारियों की बस रोक रहे, क्या यही लोकतंत्र है?

नई दिल्ली। ऐतिहासिक भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के करीब सात साल बाद सामाजिक कार्यकर्ता अन्‍ना हजारे ने केन्द्र में लोकपाल नियुक्त करने की अपनी मांग को लेकर शुक्रवार (23 मार्च) को दिल्‍ली के रामलीला मैदान में अनिश्चतकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। 2011 में भी यहीं से उन्‍होंने आंदोलन की शुरुआत की थी।

अन्‍ना ने कहा, ‘अंग्रेज चले गए पर लोकतंत्र नहीं मिला है। गोरे गए और काले आ गए।’ उन्‍होंने कहा, ‘किसानों के प्रश्न पर करेंगे या मरेंगे। 80 साल की उम्र में मैं समाज और देश के लिए जान दे दूंगा तो कोई ग़म नहीं होगा।’ उन्‍होंने कहा कि सरकार हिल रही है और मंत्री कह रहे हैं कि हम ये काम करते हैं, लेकिन मैंने कहा कि मुझे इनके शब्दों पर यक़ीन नहीं है। अनशन पर बैठने से पहले अन्ना राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को नमन किया।

सरकार पर अन्ना ने लगाए गंभीर आरोप

अनशन पर बैठने से पहले अन्ना हजारे ने न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा कि उनके समर्थक दिल्ली कूच ना कर सकें, इसलिए प्रशासन ने ट्रेनों को रद्द कर दिया है। जगह-जगह बसें रोकी जा रही हैं। ट्रेनों को रद्द करके सरकार ने किसानों को हिंसा करने के लिए मजबूर कर दिया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन पर बैठने से पहले मैंने कई खत लिखकर कहा कि मुझे किसी तरह के पुलिस प्रोटेक्शन की आवश्यकता नहीं है। अन्ना ने कहा कि सरकार का ऐसा रवैया उन्हें समझ नहीं आ रहा है।

बताया, क्‍यों नहीं हो रही लोकपाल की नियुक्ति ?

अन्ना हजारे ने कहा कि लोकपाल की नियुक्ति के पीछे देरी का कारण यह है कि प्रधानमंत्री को डर है कि एक बार इसके वास्तविकता बन जाने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय व उनके कैबिनेट के सदस्य इसके दायरे में आ जाएंगे। बता दें कि हजारे के मौजूदा सत्याग्रह का मकसद किसानों की समस्याओं व चुनाव सुधार की जरूरतों को उजागर करना भी है। हजारे ने बीते रविवार कहा कि वह तीन साल से इन मुद्दों पर चुप थे और केंद्र की भाजपा की अगुवाई वाली सरकार से इन मुद्दों पर बातचीत की कोशिश कर रहे थे।

अन्ना ने किया था जेल में सत्याग्रह का एलान

बता दें कि अन्ना हजारे ने बीते 16 मार्च को कहा था कि उन्होंने 23 मार्च से दिल्ली की जेल में सत्याग्रह करने का एलान किया है, लेकिन प्रशासन ने उन्हें अब तक इसकी अनुमति नहीं दी। हजारे ने कहा था कि उन्होंने चार महीने पहले ही इस बाबत अनुमति मांगी थी। हजारे ने यहां एक प्रेस वार्ता में कहा था, ‘मैंने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और दिल्ली के पुलिस आयुक्त को चार महीने में 16 पत्र लिखे हैं, लेकिन मुझे अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।’ हजारे ने कहा कि सरकार जान-बूझकर बाधा उत्पन्न कर रही है, लेकिन इससे प्रदर्शन नहीं रुक पाएगा।

Related Post

राणा अयूब ने पोस्ट की इस्तांबुल की फोटो, टि्वटर यूजर्स बोले-अब वापस मत आना

Posted by - October 23, 2017 0
पत्रकार राणा अयूब ने रविवार (22 अक्टूबर) को ट्विटर पर एक तस्वीर शेयर करके लिखा, “सलाम इस्तांबुल” तो कुछ ट्विटर…

कासगंज हिंसा पर सीएम योगी सख्त, अराजकता फैलाने वालों से सख्ती से निपटेंगे

Posted by - January 31, 2018 0
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश सरकार से कासगंज में हुई हिंसा पर मांगी रिपोर्ट लखनऊ। कासगंज में सांप्रदायिक हिंसा…

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *