डेटा चोरी : मार्क जुकरबर्ग ने मानी गलती, केंद्र ने दी थी तलब करने की धमकी

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न्यूयॉर्क/नई दिल्ली। डेटा चोरी मामले में चार दिन बाद आखिरकार फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने माना है कि लोगों का डेटा बचाए रखने में कोताही हुई और उनकी कंपनी ने बड़ी भूल की है। बता दें कि इस मामले में भारत और कई अन्य देशों की ओर से नाराजगी जताई गई थी। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को ये बात तक कही थी कि अगर किसी भारतीय का डेटा चुराया गया होगा, तो जुकरबर्ग को तलब किया जाएगा।

फेसबुक अब क्या कर रहा है ?
मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि फेसबुक को यूजर्स का डेटा चोरी होने से बचाने के लिए अभी कई कदम उठाने हैं। उन्होंने फेसबुक पोस्ट में लिखा है कि उनकी कंपनी ऐसे एप को फेसबुक एक्सेस नहीं देगी, जो डेटा चुरा सकें। साथ ही एप बनाने वाले डेवलपर्स को ऑडिट कराना होगा।

क्या है मामला ?
चार दिन पहले ब्रिटिश कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिका के एक पूर्व कर्मचारी ने खुलासा किया था कि अमेरिका में डोनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने से पहले कंपनी ने 5 करोड़ से ज्यादा फेसबुक यूजर्स का डेटा चुराकर उसकी एनालिसिस की थी, जिसके बाद ट्रंप को जिताने के लिए कंपनी ने रणनीति बनाई थी। इसके बाद पूरी दुनिया में हंगामा मच गया था।

बीजेपी और कांग्रेस में आरोप-प्रत्यारोप
इस मामले में बुधवार को बीजेपी नेता और केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया था कि 2014 में राहुल गांधी और कांग्रेस ने विवादित कंपनी की सेवाएं ली थीं। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कंपनी की वेबसाइट के होम पेज का स्क्रीनशॉट दिखाते हुए दावा किया था कि बीजेपी और जेडीयू ने साल 2010 में बिहार चुनाव में कैम्ब्रिज एनालिटिका की मदद ली।

बीजेपी ने कांग्रेस के आरोप पर क्या कहा ?
कांग्रेस के आरोप के बाद बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा मीडिया के सामने आए। उन्होंने ये सवाल उठाया कि जिस कंपनी की स्थापना ही साल 2013 में हुई हो, उसकी सेवाएं 2010 में बीजेपी और जेडीयू किस तरह ले सकती हैं।

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