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जल दिवस आज, बेंगलुरु समेत दुनिया के 200 शहरों पर ‘डे जीरो’ का खतरा

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नई दिल्ली। आज (22 मार्च) अंतरराष्ट्रीय जल दिवस है। दुनिया में पानी की लगातार बढ़ती किल्लत के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए जल दिवस मनाया जाता है। फिर भी हालात बद से बदतर हो रहे हैं। ताजा आंकड़े कहते हैं कि बेंगलुरु समेत दुनिया के 200 शहरों में ऐसा दिन जल्दी देखने को मिल सकता है, जब वहां पानी की एक बूंद नहीं मिलेगी। ऐसे हालात को ‘डे जीरो’ कहा जाता है।

क्या कहती है रिपोर्ट ?
एक रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका में डे जीरो जैसे हालात बन चुके हैं और बेंगलुरु में भी जल्दी ही पानी की गंभीर समस्या हो सकती है। हैरत की बात ये इसलिए है, क्योंकि बेंगलुरु को ताल-तलैयों का शहर कहा जाता है। फिर भी अगर पानी की किल्लत हो तो किसी को भी अचरज हो सकता है। दरअसल, बेंगलुरु के ताल और तलैयों को पाटकर रिहायशी इलाके बनाए जा रहे हैं। काफी दिनों से चल रहे इस गोरखधंधे की वजह से पानी की भीषण कमी का सामना लोगों को करना पड़ रहा है।

उत्तर भारत को भी खतरा
बेंगलुरु तो दक्षिण भारत में है, उत्तर भारत के मैदानी इलाकों की बात करें, तो यहां भी हालात विषम हैं। बड़ी और नामचीन नदियां जैसे गंगा और यमुना भले ही उत्तर भारत से होकर बहती हैं, लेकिन पेयजल हासिल करना यहां मुश्किल भरा काम होता है। भूजल में कहीं आर्सेनिक है, तो कहीं कोई और प्रदूषक तत्व मिला हुआ है। इसके साथ ही लगातार भूजल के दोहन से इसका स्तर भी लगातार गिर रहा है। कई जगह तो 450 से 500 फुट नीचे पानी जा चुका है।

क्या है उपाय ?
पानी की किल्लत को खत्म करने के तमाम उपाय हैं। इनमें जरूरत के मुताबिक ही पानी का इस्तेमाल करना और बारिश के पानी को डीप पिट्स के जरिए जमीन में गहराई तक पहुंचाना शामिल है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग के जरिए भी लगातार खत्म होते भूजल को फिर से हासिल कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए नियम और कानून को सख्त करने की भी जरूरत है।

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