यूपी के इस कद्दावर मंत्री का कुनबा धीरे-धीरे छोड़ने लगा भाजपा का साथ

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  • पहले स्‍वामी प्रसाद मौर्य के भतीजे ने थामा सपा का दामन, अब दामाद भी पहुंचे सपा दरबार में

गोरखपुर। दलबदलुओं को खूब उदार होकर 2017 में पार्टी में स्वागत करने वाली बीजेपी अब इन्हीं की वजह से अपनी किरकिरी भी करा रही है। बसपा के जिस कद्दावर नेता स्वामी प्रसाद मौर्य को तोड़कर विधानसभा चुनाव में बीजेपी फूले नहीं समा रही थी, उसी स्वामी प्रसाद मौर्य का कुनबा धीरे-धीरे बीजेपी को मझधार में छोड़ता जा रहा है।

प्रदेश सरकार के काबीना मंत्री और पडरौना के विधायक स्वामी प्रसाद मौर्य के भतीजे के बाद अब उनके दामाद ने भी भारतीय जनता पार्टी को अलविदा कर दिया है। उपचुनाव में मिली बीजेपी को हार के बाद मौर्या के कुनबे के सदस्यों का समाजवादी पार्टी से बढ़ती नजदीकियों का राजनीतिक पंडित तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं।

स्वामी प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री यूपी

बसपा ने स्वामी प्रसाद को पडरौना में किया था स्थापित

2007 में बसपा की सरकार बनने के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य सहकारिता मंत्री बनाए गए थे। प्रदेश अध्यक्ष भी स्वामी प्रसाद मौर्य ही थे। रायबरेली-प्रतापगढ़ को राजनीतिक कर्मभूमि बनाने वाले स्वामी प्रसाद को बसपा सुप्रीमो ने कुशीनगर भेजा। पडरौना लोकसभा सीट पर स्वामी प्रसाद मौर्य ने दमदार उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन कांग्रेस के दिग्गज नेता और तत्कालीन विधायक आरपीएन सिंह से लोकसभा चुनाव हार गए। लेकिन इसके बाद उन्होंने पडरौना को ही राजनीतिक कर्मक्षेत्र बनाया।

2009 के उपचुनाव में पडरौना से बने थे विधायक

आरपीएन सिंह ने लोकसभा में पहुंचने के बाद पडरौना विधायक के पद से इस्तीफा दे दिया। 2009 में पडरौना विधानसभा क्षेत्र की रिक्त सीट पर उपचुनाव हुआ। केंद्रीय गृहराज्य मंत्री बन चुके आरपीएन सिंह की मां कुंवरानी मोहिनी देवी कांग्रेस प्रत्याशी बनीं। बसपा ने स्वामी प्रसाद मौर्य को उपचुनाव में उतारा। लोगों ने केंद्र में एक मंत्री आरपीएन सिंह के बनाए जाने के बाद इस उम्मीद से स्वामी प्रसाद मौर्य को जिताया कि वह प्रदेश की बसपा सरकार में मंत्री रहेंगे। पूरी सत्ता पडरौना में लग गई और स्वामी प्रसाद मौर्य 80 हजार से अधिक मत पाकर चुनाव जीत गए।

2017 में पाला बदल बसपा से आए थे भाजपा में

इसके बाद 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में भारी विरोध के बाद भी स्वामी प्रसाद मौर्य चुनाव जीतने में कामयाब हुए, हालांकि वह करीब 42 हजार वोट पर पहुंच गए। लेकिन बीते विधानसभा चुनाव में अचानक स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपना पाला बदला। बसपा का साथ छोड़ने के साथ ही उन्होंने बीजेपी को अपना खेवनहार बनाया। बसपा सुप्रीमो मायावती को जगह-जगह खरी-खोटी सुनाने लगे। बीजेपी की लहर में स्‍वामी प्रसाद पडरौना से एक बार फिर जीतने में कामयाब हुए। भाजपा की सरकार बनी तो उन्‍हें मंत्री पद से भी नवाजा गया।
देवी-देवताओं को गाली देने पर हुए थे चर्चित

पडरौना विधानसभा क्षेत्र को अपना राजनीतिक कर्मक्षेत्र बनाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य उस समय चर्चा में आए थे, जब उन्होंने पिपरा बाजार में हिंदू देवी-देवताओं को गाली दी थी। उन्होंने भगवान विष्‍णु के वाराह रूप और गोबर से बने गौरी-गणेश की पूजा करने से मना किया था।

मौर्य के भतीजे ने कुछ दिन पूर्व ही सपा ज्वाइन की

काबीना मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के भतीजे एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रमोद कुमार मौर्य ने कुछ दिन पूर्व ही समाजवादी पार्टी का दामन थामा था। इसको लेकर स्वामी प्रसाद मौर्य का खेमा अभी बचाव कर ही रहा था कि उनकी बेटी संघमित्रा मौर्य के पति डॉ. नवल किशोर शाक्य के शनिवार (17 मार्च) को समाजवादी पार्टी मुख्यालय पहुंचने से एक बात की चर्चा फिर शुरू हो गई है कि इस कुनबे ने फिर दलबदल कर नए राजनीतिक संकेत देने शुरू कर दिए हैं। बता दें कि स्वामी प्रसाद मौर्य अपने बेटे उत्कर्ष मौर्य और बेटी संघमित्रा मौर्य को राजनीति में स्‍थापित करने के लिए जी-जान से जुटे हुए हैं। बीते विधानसभा चुनाव में उत्कर्ष चुनाव हार गए थे जबकि बसपा से 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ने वाली संघमित्रा मौर्य को भी हार का सामना करना पड़ा था।

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