नमो ने दिया नया मंत्र – आज से पीएम मतलब मोदी नहीं, पोषण मिशन

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  • प्रधानमंत्री ने की राष्ट्रीय पोषण मिशन की शुरुआत, कहा – बेटियां बोझ नहीं परिवार की शान हैं
  • पीएम नरेंद्र मोदी ने की ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को जन आंदोलन बनाने की अपील

झुंझुनूं (राजस्‍थान)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘मेरे विरोधी जितना भी मुझे भला-बुरा कहें उनकी मर्जी है। बस ऐसा करें कि अगर पीएम बोलें तो उसका मतलब नरेंद्र मोदी (प्रधानमंत्री) नहीं, पोषण मिशन होना चाहिए। इससे इस मिशन को बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी। हमें कुपोषण के खिलाफ जंग लड़नी होगी। पीएम मोदी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर गुरुवार (8 मार्च) को राजस्थान के झुंझनू में एक रैली को संबोधित कर रहे थे। ये रैली ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ थीम पर आयोजित थी।

इस मौक़े पर प्रधानमंत्री मोदी ने झुंझुनू में ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान के विस्तार कार्यक्रम की शुरुआत की। ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम वर्तमान में 161 ​जिलों में चलाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने आज इसका विस्तार कर देशभर के 640 जिलों में इसकी शुरुआत की। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने इस योजना की लाभार्थी महिलाओं और बच्चियों से सीधा संवाद किया और देशभर के सर्वश्रेष्ठ जिलों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित भी किया।

इसी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय पोषण मिशन (एनएनएम) की शुरुआत भी की। इस योजना के तहत राजस्थान का झुंझुनूं और सीकर लिंग अनुपात के मामले में देश का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला जिला बन गया है। इसी कारण झुंझुनू में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इनके अलावा रायगढ़ (महाराष्ट्र), सोनीपत (हरियाणा), हैदराबाद (तेलंगाना), बीजापुर (कर्नाटक), तरनतारन (पंजाब), उधमपुर (जम्मू कश्मीर), अहमदाबाद (गुजरात) और उत्तर सिक्किम (सिक्किम) देश में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले पहले 10 ज़िले घोषित किए गए हैं।

पीएम मोदी ने रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘बेटी बोझ नहीं, बेटी पूरे परिवार की आन, बान और शान है। आप अपने आस-पास देखिए कि कैसे लड़कियां हमारे देश को गौरवान्वित कर रही हैं। वे कई क्षेत्रों में श्रेष्‍ठ कर रही हैं।’ मोदी ने जोर देते हुए कहा, ‘बेटा-बेटी एक’ भाव के लिए हमें एक सामाजिक और जन आंदोलन खड़ा करने की जरूरत है। मैं सभी से अपील करूंगा कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को जन आंदोलन बनाना होगा।’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता किसी भी समाज को आगे बढ़ा सकती है और समृद्ध बना सकती है, इसलिए आओ हम सभी संकल्‍प लेते हैं कि लड़कों जितनी लड़कियां भी जन्‍म लेंगी। बेटा-बेटी एक समान हैं।’   (एजेंसी)

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