गोरखपुर उपचुनाव : भाजपा को हराने के लिए बसपा का सपा को समर्थन

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गोरखपुर। लोकसभा उपचुनाव के लिए समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी एक साथ आ चुके हैं। रविवार (4 मार्च) को दोनों दलों के बीच हुए एका का औपचारिक ऐलान किया गया। इस नए समीकरण से सियासी हलकों में भूचाल सा आ गया है। उपचुनाव को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। रविवार को गोरखपुर में बसपा के कोआर्डिनेटर घनश्याम खरवार, समाजवादी पार्टी के एमएलसी उदयवीर सिंह, सपा जिलाध्यक्ष प्रहलाद यादव, निषाद दल के डॉ. संजय निषाद ने एक मंच पर आकर इसका ऐलान किया।

राजनीति को समझने वाले यह मानते हैं कि बसपा और सपा के एक साथ आने से सियासी क्षेत्र में बड़े बदलाव की संभावना है। सबसे अहम यह कि यादव-मुस्लिम वोट बैंक वाले सपा को दलितों का एकमुश्त वोट मिलने से कई अन्य राजनीतिक दलों की चूलें हिल सकती हैं। गोरखपुर संसदीय क्षेत्र की राजनीतिक सियासत में पिछड़े वोट बैंक का बहुत ही महत्व है। दलित बहुल इस क्षेत्र में यादव व मुसलमान मतदाताओं की भी बहुलता है। चूंकि, निषाद समुदाय के नेता डॉ. संजय निषाद की पार्टी का सपा को समर्थन प्राप्त है, साथ ही मुसलमानों को राजनीतिक प्लेटफार्म देने वाले पीस पार्टी के नेता डॉ. अयूब भी समर्थन में हैं, ऐसे में बसपा के साथ आने से भाजपा को रणनीतिक रूप से नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इस संसदीय क्षेत्र में दलित वोट बैंक के महत्व को इस तरह से भी समझा जा सकता है कि दो बड़ी बिरादरी ठाकुर और ब्राह्मण के एक मंच पर साथ आने के बाद भी भाजपा निषाद बिरादरी के वोट बैंक में सेंधमारी की हर जुगत लगा रही है। आज इसीलिए अनुसूचित जाति सम्मेलन कराया जा रहा ताकि दलित वोट का कुछ हिस्सा बटोरा जा सके। हालांकि, सपा-बसपा के साथ आने और छोटे दलों के समर्थन से सियासी तौर पर किसको नफा और किसको नुकसान होगा यह आने वाला समय तय करेगा, लेकिन एक बात तो साफ है कि इस नए समीकरण के संकेत ने कई मजबूत दलों के होश जरूर उड़ा दिए हैं।

मायावती बोलीं – सपा-बसपा में गठबंधन नहीं, भाजपा को हराना लक्ष्य

लखनऊ। सपा-बसपा में गठबंधन की खबरों पर सफाई देने के लिए रविवार शाम तक मायावती खुद मीडिया के सामने आ गईं। उन्होंने कहा कि बीएसपी ने कर्नाटक के अलावा किसी अन्य राज्य में किसी भी पार्टी के साथ कोई गठबंधन नहीं किया है। फूलपुर और गोरखपुर उपचुनाव में सपा को समर्थन के सवाल पर सफाई देते हुए मायावती ने कहा, ‘इन दोनों सीटों पर बसपा ने पूर्व की भांति अपने उम्मीदवार नहीं उतारे हैं। मैंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि जो भी विपक्षी उम्मीदवार बीजेपी को हराता नजर आए, उसे अपना कीमती वोट दो। सपा उम्मीदवार को वोट देने के निर्देश को उन्होंने तथ्यों से परे बताया।’  मीडिया द्वारा गठबंधन की खबरों को प्रचारित करने पर मायावती जमकर बरसीं। उन्होंने कहा कि यह गठबंधन नहीं बल्कि वोटों का हस्तांतरण है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

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