हाईकोर्ट की सख्ती के बाद गोरखपुर मंडल के 1055 धार्मिक स्थलों पर संकट !

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  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में अवैध ढंग से बने धार्मिक स्थलों को हटाकर दो महीने में रिपोर्ट देने को कहा

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में अब अवैध रूप से अतिक्रमण कर रास्तों पर बनाए गए धार्मिक स्थलों को हटाया जाएगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसके लिए कड़ा रुख अपनाया है। इस आदेश के बाद गोरखपुर मंडल के भी करीब 1100 धार्मिक स्थल प्रभावित होंगे। प्रशासन के अनुसार, अवैध ढंग से इन धार्मिक स्थलों का निर्माण कराया गया है। प्रशासन केवल धार्मिक भावना भड़कने की वजह से इन धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई करने से परहेज करता रहा है।

बता दें कि कुछ साल पहले हाईकोर्ट ने ही शासन को निर्देश दिया था कि ऐसे धार्मिक स्थलों को चिह्नित किया जाए जो अवैध ढंग से कब्जा कर या रास्तों पर बने हुए हैं। कुछ साल पहले शासन के निर्देश पर गोरखपुर मंडल में भी ऐसे धार्मिक स्थलों को चिह्नित कर उनको हटाने की कार्रवाई की कवायद शुरू करने की कोशिश की गई थी। लेकिन प्रदेश के किन्हीं अन्य जनपद में धार्मिक बवाल बढ़ने की वजह से पूरी रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। कुछ साल पहले की इस रिपोर्ट के अनुसार, गोरखपुर मंडल में 1055 ऐसे धार्मिक स्थल चिह्नित किए गए थे जिनका निर्माण अवैध ढंग से किया गया था।

किस जिले में कितने धार्मिक स्थल चिह्नित
कुछ साल पूर्व की रिपोर्ट के अनुसार, अवैध ढंग से निर्माण कराए गए धार्मिक स्थल सबसे अधिक देवरिया जिले में हैं। देवरिया में 465 ऐसे स्‍थलों को चिह्नित किया गया था। गोरखपुर में 405 ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जबकि कुशीनगर जिले में इनकी संख्‍या 94 है। महराजगंज में 89 ऐसे धार्मिक स्थल हैं।

क्‍या है इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि 1 जनवरी, 2011 के बाद अतिक्रमण कर रास्तों पर बने धार्मिक स्थलों को हटाया जाए। यही नहीं, इसके पहले के धार्मिक स्थलों को छह माह का समय देकर किसी दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए। न्यायालय ने कहा है कि प्रदेश में धार्मिक स्थलों के नाम पर अतिक्रमण हो रहा है, इसे रोका जाए। जो अवैध हैं, उन्‍हें तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि कानून के विपरीत किसी को भी धार्मिक अधिकार नहीं दिया जा सकता है। एक मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने मुख्य सचिव को आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह कहा है कि संबंधित जिलों के डीएम व एसपी दो माह के अंदर अनुपालन रिपोर्ट देंगे। आदेश नहीं मानने वाले अधिकारियों को अवमानना का दोषी माना जाएगा। मुख्य सचिव 28 मई को हाईकोर्ट के सामने रिपोर्ट पेश करेंगे।

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