प्रिया प्रकाश वारियर को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर पर लगाई रोक

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  • सुप्रीम कोर्ट ने मलयालम अभिनेत्री पर तेलंगाना और महाराष्ट्र में दर्ज एफआईआर पर लगाई रोक

नई दिल्लीसुप्रीम कोर्ट ने मलयालम अभिनेत्री प्रिया प्रकाश वारियर के खिलाफ सभी एफआईआर पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने किसी राज्य को इस मामले में एफआईआर या कारवाई न करने के आदेश दिए हैं। साथ ही एफआईआर दर्ज कराने वालों को कोर्ट ने नोटिस जारी किया। बता दें कि मलयालम फिल्म ‘ओरु अदार लव’ के गाने को लेकर उनके और निर्देशक उमर अब्दुल वहाब के खिलाफ तेलंगाना और महाराष्ट्र में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी।

ये विवाद फिल्म के गाने ‘माणिक्य मलाराया पूवी…’ को लेकर हुआ, जो कि केरल के मालाबार क्षेत्र का एक पारंपरिक मुस्लिम गीत है। यह गाना पैगम्बर मोहम्मद और उनकी पहली पत्‍नी के बीच प्रेम का वर्णन और प्रशंसा करता है। इस गाने के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद तेलंगाना, रजा अकादमी और जन जागरण समिति ने मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को कथित तौर पर चोट पहुंचाने के लिए एफआईआर दर्ज कराई थी। याचिकाकर्ताओं ने याचिका में कहा है कि तेलंगाना और महाराष्ट्र में गाने की गलत व्याख्या के आधार पर विभिन्न समूहों द्वारा आपराधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं और इसी तरह की शिकायतें अन्य गैर-मलयालम भाषी राज्यों में भी दर्ज होने की संभावना है।

‘ओरू अदार लव’ के मेकर्स की ओर से दी गई याचिका में कहा गया है कि इस गीत को मूल रूप से केरल के एक पुराने लोकगीत के तौर पर पीएमए जब्बार द्वारा 1978 में लिखा गया था, जिसे पहली बार थलासेरी रफीक ने पैगम्बर और उनकी पत्‍नी की प्रशंसा में गाया था। बिना किसी आधार के यह दावा किया गया है कि यह मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं को नुकसान पहुंचाता है। यह समझना मुश्किल है कि पिछले 40 सालों से जो गाना आस्तित्व में है, जिसे मुस्लिमों ने ही लिखा और केरल में मुस्लिम समुदाय की ओर से पोषित हुए इस गीत को अब पैगम्बर और उनकी पत्‍नी के अपमान के रूप में माना जा रहा है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि युवा अभिनेत्री और उसके परिवार के जीवन के लिए खतरे को देखते हुए एफआईआर और आपराधिक शिकायतें अनुच्छेद 21 के तहत जीने के अधिकार का उल्लंघन हैं। ये अनुच्छेद 19(1) (ए) और 19(1) (जी) के तहत अभिव्यक्ति की आजादी का हनन भी है।  (एजेंसी)

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