अब आपका स्मार्टफोन बचाएगा फूड प्वॉयजनिंग से

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  • मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट विश्वविद्यालय के खाद्य वैज्ञानिकों ने खोजी एक अनूठी तकनीक
  • वैज्ञानिकों ने स्‍मार्टफोन की सहायता से फूड प्‍वॉयजनिंग से बचाव का तरीका विकसित किया

बाजार में ऐसे कई खाद्य पदार्थ मिलते हैं, जिन्‍हें हम घर लाकर धोने के बाद (कभी-कभी बिना धोए भी ) सीधे खा लेते हैं, बिना यह जाने-समझे कि कहीं वे हमारी सेहत के लिए हानिकारक तो नहीं। वास्‍तव में बाजार में खुले में बिकने वाले बहुत से खाद्य पदार्थों में बैक्‍टीरिया हो सकते हैं, लेकिन हम इनसे अनभिज्ञ रहते हैं। अब मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसके जरिए हम घर बैठे किसी खाद्य पदार्थ में बैक्‍टीरिया का पता लगा सकते हैं, और यह संभव होगा आपके स्‍मार्टफोन से। प्रस्‍तुत है धर्मेन्‍द्र त्रिपाठी की रिपोर्ट –

मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट विश्वविद्यालय के खाद्य वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक खोजी है, जिसका इस्‍तेमाल करने के बाद फूड प्‍वॉयजनिंग से बचाव करना बहुत आसान हो जाएगा। आप घर बैठे जान सकेंगे कि पानी या किसी खाद्य पदार्थ में कोई बैक्‍टीरिया है या नहीं। इस तकनीक का प्रमुख हिस्‍सा है आपका स्‍मार्टफोन।

मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट विश्वविद्यालय की खाद्य विज्ञानी लियन मैकलैंड्सबोरो (बाएं) और प्रोफेसर लिली हे

आपको बीमार बनाने वाले बैक्‍टीरिया जैसे ई-कोलाई या साल्‍मोनेला की पहचान करने के लिए वर्तमान में खाद्य वैज्ञानिक आमतौर पर डीएनए परीक्षण का सहारा लेते हैं। वे कच्ची पालक या मुर्गी की त्वचा से नमूने लेते हैं और उसके बाद उन्‍हें अच्‍छी तरह धुलकर पानी से बैक्टीरिया के छोटे से टुकड़े को इकट्ठा करते हैं। इस नमूने को 24 घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है ताकि बैक्टीरिया अच्‍छी तरह विकसित हो जाएं। इन सब प्रक्रिया में समय और विशेष उपकरणों की जरूरत पड़ती है और इसके लिए आपको लैब में जाना पड़ता है।

मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय की सूक्ष्म जीवविज्ञानी (microbiologist) लियन मैकलैंड्सबोरो ने बताया, ‘खाने में बैक्टीरिया बहुत ही कम संख्या में हो सकते हैं लेकिन इसके बावजूद वे बीमारी का कारण बन सकते हैं, इसलिए कम संख्‍या के बाद भी इनका पता लगाना आवश्यक है।’ मैकलैंड्सबोरो मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय के खाद्य विज्ञान की प्रोफेसर लिली हे के साथ काम कर रही हैं। वे बताती हैं कि भोजन में हानिकारक जीवाणुओं का पता लगाने के लिए बहुत सरल और अधिक सुलभ उपकरण है एक स्मार्टफोन ऐप जिसके साथ 30 डॉलर का एक माइक्रोस्कोप अटैच करना पड़ता है।

स्मार्टफोन के साथ अटैच माइक्रोस्कोप

प्रोफेसर लिली के लैब में काम करने वाले एडम सालहैनी ने बताया कि इस उपकरण में रसायन लगा एक चिप होता है, जो अत्‍यंत छोटे बैक्‍टीरिया को भी चिपका लेता है। इस चिप को हम दूषित पानी में आधे घंटे के लिए डाल देते हैं। अगर पानी में बैक्‍टीरिया होगा तो उसका पता लग जाएगा। सालहैनी बताते हैं कि आप किसी भी स्मार्ट फोन के साथ इस माइक्रोस्कोप को अटैच कर सकते हैं। फिलहाल वे आईफोन-7 का इस्‍तेमाल कर रहे हैं। आपको इस माइक्रोस्‍कोप को स्‍मार्टफोन के कैमरे के ऊपर लगाना पड़ता है। इसके बाद माइक्रोस्‍कोप को सोने की चिप के ऊपर केंद्रित करते हैं। फिर चिप की इस तस्‍वीर को बड़ा करते हैं। यदि चिप के ऊपर बैक्‍टीरिया चिपके होंगे तो वे काले डॉट्स के रूप में दिखाई देंगे।

इन वैज्ञानिकों का मानना है कि ये परीक्षण किट बहुत ही उपयोगी है और इसे हर घर में रखना चाहिए। यह प्राकृतिक आपदाओं के बाद पीने के पानी का परीक्षण करने में भी उपयोगी साबित हो सकती है। मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का कहना है कि कई खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों ने उनसे संपर्क किया है क्योंकि यह शोध पिछले महीने ही सार्वजनिक हो गया था, लेकिन इसे अभी बाजार में आने में कई साल लगेंगे।

मैकलैंड्सबोरो ने कहा, ‘वास्‍तव में यह अभी शुरुआती चरण है। हम अभी आईफ़ोन के साथ बैक्टीरिया का पता लगा सकते हैं, लेकिन हमें यह पता नहीं है कि वे रोग पैदा करने वाले बैक्‍टीरिया हैं या नहीं। दूसरे शब्‍दों में वे हानिकारक बैक्टीरिया हैं या अच्छे बैक्टीरिया हैं।’ वह कहती हैं कि हम एक तकनीक विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं जिसके माध्‍यम से हम बैक्टीरिया की सटीक पहचान कर सकेंगे। इस दौरान अपनी खुद की खाद्य सुरक्षा के लिए, मैकलैंड्सबोरो कच्चे स्प्राउट्स और कच्चे घोंघे या सीप खाने से बचती हैं और हैमबर्गर को आधा ही पकाती हैं।

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