पीएनबी महाघोटाला : सीवीसी ने पूछा – नियमों के बावजूद कैसे हुआ घोटाला?

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  • केंद्रीय सतर्कता आयोग ने पंजाब नेशनल बैंक और वित्त मंत्रालय से 10 दिन में मांगी रिपोर्ट

नई दिल्‍ली। देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले में अब केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने केंद्र और पंजाब नेशनल बैंक से 10 दिनों के अंदर रिपोर्ट  देने को कहा है। मुख्‍य सतर्कता आयुक्‍त केवी चौधरी ने पीएनबी और वित्‍त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर ब्‍योरा पेश करने का निर्देश दिया है।

‘डीएनए’ की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में पीएनबी के अधिकारियों ने सीवीसी को अब तक की कार्रवाई के बारे में जानकारी दी। आयोग ने घोटाले में शामिल अधिकारियों के साथ ही उन अफसरों का नाम भी उजागर करने को कहा जो इस फर्जीवाड़े को रोक सकते थे। सीवीसी ने पीएनबी और वित्‍त मंत्रालय के अधिकारियों से पूछा कि तमाम तरह के नियम-कायदे होते हुए भी घोटाला कैसे हो गया? आयोग ने इस पर 10 दिनों के अंदर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इस बैठक में सतर्कता आयुक्‍त टीएम भसीन भी मौजूद थे।

हीरा व्‍यवसायी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने पीएनबी अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी दस्‍तावेज के आधार पर एलओयू जारी करा लिया था। इसके जरिए बैंकों को 11,400 करोड़ रुपये का चूना लगाया गया। हालांकि, जांच एजेंसी ने घोटाले की रकम इससे कहीं ज्‍यादा होने का अंदेशा जताया है। सीबीआई ने सोमवार (19 फरवरी) को भी नीरव मोदी और चोकसी समेत अन्‍य आरोपियों के ठिकानों और स्‍टोर पर छापे मारे। ईडी के अधिकारियों ने इलाहाबाद बैंक के पूर्व निदेशक दिनेश दुबे के आवास पर भी दबिश दी। एजेंसी अब तक देशभर के 20 शहरों के 50 से ज्‍यादा ठिकानों पर छापे मार चुकी है।

नकली हीरे बेचते थे मेहुल चोकसी

मेहुल चोकसी को लेकर एक औरर सनसनीखेज खुलासा हुआ है। चोकसी की कंपनी गीतांजलि जेम्‍स के पूर्व प्रबंध निदेशक संतोष श्रीवास्‍तव ने कंपनी पर नकली हीरे बेचने का आरोप लगाया है। ‘मनीकंट्रोल’ की रिपोर्ट के अनुसार, संतोष ने बताया कि लैब में विकसित हीरों को भी ऊंची कीमतों पर बेचा जाता था। उन्‍होंने कहा, ‘ब्रांड वैल्‍यू के नाम पर हीरों को प्रीमियम बताकर बेचा जाता था। इसके लिए फर्जी तरीके से प्रमाणपत्र हासिल किए जाते थे। जिन हीरों को ग्रेड-ए के तहत बेचा जाता था वे हकीकत में ग्रेड-सी के होते थे। जिन हीरों को उत्‍कृष्‍ट और दुर्लभ कह कर बेचा जाता था, दरअसल उन्‍हें लैब में विकसित किया जाता था। उन हीरों को जिस कीमत पर बेचा जाता था, हकीकत में उसका वास्‍तविक मूल्‍य उसका 5 से 10 फीसद तक होता था।’ संतोष ने वर्ष 2013 तक गीतांजलि जेम्‍स में रीटेल बिजनेस हेड के तौर पर काम किया था। बता दें कि गीतांजलि जेम्‍स के देशभर में लाखों-करोड़ों ग्राहक हैं।

ताइवान, हांगकांग और दुबई से भी जुड़े तार

पीएनबी घोटाले के तार ताइवान, हांगकांग और दुबई से भी जुड़ गए हैं। ‘बिजनेस स्‍टैंडर्ड’ की रिपोर्ट के अनुसार, पीएनबी के कुछ अधिकारियों ने नीरव मोदी के प्रभाव में आकर फरवरी में एक सप्‍ताह से भी कम समय में हांगकांग की कुछ कंपनियों को 45 मिलियन डॉलर (290 करोड़ रुपये) का भुगतान किया था। इन कंपनियों के मालिक सूरत, ताइपे, दुबई और और हांगकांग तक में फैले हुए हैं। बता दें कि हांगकांग स्थित भारतीय बैंकों की शाखाओं द्वारा कुछ कंपनियों को भुगतान किया गया था। इन कंपनियों के बारे में ज्‍यादा ब्‍योरा अभी उपलब्‍ध नहीं है। ये कंपनियां ईडी और सीबीआई के रडार पर हैं। ऐसी ही एक कंपनी की पहचान औरा जेम्‍स के तौर पर की गई है। यह हांगकांग में स्थित है, जिसे भारतीय नागरिक शैलेष सोनू मेहता दुबई से संचालित करते हैं। हांगकांग में ही स्थित साइनो ट्रेडर्स को भी नीरव मोदी की कंपनी द्वारा भुगतान किया गया था। ताइवानी नागरिक मिन तुंग ली इसके मालिक हैं।

तीन साल से अधिक समय से जमे बैंक अफसरों के करें ट्रांसफर : सीवीसी

नई दिल्‍लीपंजाब नेशनल बैंक में हुए 11400 करोड़ रुपए के महाघोटाले ने पूरे देश को हैरान कर दिया है। इस घोटाले के बाद केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने सभी बैंकों को उन अधिकारियों के ट्रांसफर का आदेश दिया है, जो एक ही शाखा में तीन साल से अधिक समय से जमे हैं। सीवीसी के अनुसार बैंक ऐसे सभी ट्रांसफर के बाद उनको सूचना भी दें। सीवीसी के आदेश के बाद बैंकों ने अपने सभी जोनल मुख्‍यालयों सहित अन्‍य कार्यालयों को इस सबंध में आदेश जारी कर ऐसे सभी अधिकारियों की लिस्‍ट तैयार करने का निर्देश दिया है, जो 3 साल से ज्‍यादा समय से एक ही जगह तैनात हैं। बैंक मुख्‍यालयों से जारी आदेश में तुरंत ऐसी लिस्‍ट तैयार कर मुख्‍यालय को भेजने का निर्देश दिया गया है।  एजेंसी

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