यूरोप में मांसाहार से मुंह मोड़ रहे लोग

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  • रिसर्च में खुलासा – यूरोप के देशों में पिछले चार वर्षों में 451 फीसदी बढ़े मांस के विकल्प वाले उत्‍पाद
  • यूरोप के लोग अधिक से अधिक कर रहे अनाज की फलियों का इस्‍तेमाल, ढूंढ़ रहे मांस के और विकल्प

एनॉटमी की दृष्टि से मांसाहार मानव का स्‍वाभाविक भोजन नहीं है। उसके शरीर की बनावट शाकाहारी प्राणी की है। जाहिर है, जब इंसान अपनी मूल प्रकृति के विपरीत कोई आहार ग्रहण करता है तो शरीर के लिए हानिकारक ही होगा। प्रसिद्ध मानवशास्‍त्री हेंग का कहना है कि शाकाहार ही शक्ति उत्‍पन्‍न करता है, मांसाहार से केवल उत्‍तेजना बढ़ती है। शायद यही कारण है कि यूरोप के निवासियों को शाकाहार की महत्‍ता समझ में आ गई है और वे धीरे-धीरे मांस के विकल्‍पों की ओर बढ़ रहे हैं। एक ताजा रिसर्च में सामने आया है कि यूरोप में पिछले 4 वर्षों में मांसाहार के विकल्‍पों में 451% की बढ़ोतरी हुई है। इसके विपरीत भारत में मांसाहार करने वालों की संख्‍या में इजाफा हुआा है। प्रस्‍तुत है धर्मेन्‍द्र त्रिपाठी की रिपोर्ट –  

ट्रांजिशन पाथ्‍स टू सस्‍टेनेबल लेग्‍यूम बेस्‍ड सिस्‍टम्‍स इन यूरोप (TRUE) के शोधकर्ताओं ने एक नए अध्‍ययन में पाया है कि अनाज की फलियों जैसे बीन्‍स, मसूर या सोयाबीन वाले उत्पादों के इस्‍तेमाल में यूरोप में 39% की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि यह वृद्धि पूरे महाद्वीप में एक जैसी नहीं देखी गई, इसका प्रचलन पश्चिमी यूरोप में ज्‍यादा दिखा। पुर्तगाल यूनिवर्सिटी के एक एक छात्र जोआओ फेरेरा ने बताया कि यूरोप में सबसे अधिक नए फलियों वाले उत्पाद यूनाइटेड किंगडम में (19%) लांच हुए। इसके बाद फ्रांस का (14%) नंबर था और तीसरे नंबर पर जर्मनी (13%) था।

अभी तक मांस के विकल्प के रूप में जो उत्पाद प्रयोग में लाए जाते थे, उनकी लोकप्रियता बहुत कम थी, लेकिन इस नई रिसर्च के अनुसार इसमें 451% की अप्रत्‍याशित वृद्धि देखने को मिली है। शोधकर्ताओं ने रिपोर्ट में यह भी बताया कि शाकाहारी उत्पादों के इस्‍तेमाल में 196% और ग्‍लूटेन (लसलसे पदार्थ) फ्री उत्पादों के इस्‍तेमाल में 73% की वृद्धि हुई है। इस रिसर्च के प्रमुख लेखक कार्ला टिक्सीरा कहते हैं, ‘अगर हम केटेगरी वाइज प्रोडक्‍ट की बात करें तो सबसे ज्‍यादा चौंकाने वाली वृद्धि 451% मांस के विकल्‍पों में हुई। वहीं पास्ता के इस्‍तेमाल में 295%  और फलियों पर आधारित स्‍नैक्‍स में 128%  की वृद्धि हुई।

बाजारों में यह वृद्धि सिर्फ उत्पादों की मात्रा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कई तरह के नए उत्‍पाद भी बाजार में आए हैं। शोधकर्ताओं ने यह प्रमाणित किया है कि विश्व भर के बाजारों में 27,058 बिल्कुल नए उत्पाद उतारे गए। आज नैतिक उपभोक्तावाद ढेर सारे उपभोक्ताओं के लिए बढ़ती चिंता का विषय बन रहा है, जो अपने स्वास्थ्य को बेहतर करना चाहते हैं और साथ ही पर्यावरण पर पड़ने वाले इसके दुष्‍प्रभाव को कम करना चाहते हैं। शायद इसी का नतीजा है कि आज बाजार में मांस के विकल्‍प वाले उत्‍पादों (और संभवत: स्‍वादिष्‍ट भी) की भरमार है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान उपभोक्ताओं की पसंद और वरीयता भी बदली। हालांकि फलियों में हरी बीन्स वर्ष 2017 के मध्‍य तक सबसे लोकप्रिय थी, लेकिन 2013 की तुलना में इसकी कुल हिस्सेदारी में 23% की कमी आई। इस बीच चना में 47% और मसूर की दाल में 8% की वृद्धि हुई।

शोध के ये नतीजे बताते हैं कि ये प्रवृत्तियां उत्‍साहजनक हैं। वास्‍तव में फलियां मांस की तुलना में अधिक पौष्टिक हैं जो आपके स्‍वास्‍थ्‍य के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी बेहतर हैं। फलियों के इस्‍तेमाल से मधुमेह और हृदय रोग के खतरे काफी कम हो जाते हैं, वहीं सस्ता होने के साथ ही इसे पकाने के लिए मांस की तुलना में बहुत कम ऊर्जा और पानी की आवश्यकता होती है। अगर आप मांस खाना नहीं भी छोड़ते हैं तो भी अपने आहार में फलियों की मात्रा बढ़ाकर अपने स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर बना सकते हैं। रिसर्च के अनुसार, यूरोप में पशुओं की खपत में भी धीरे-धीरे गिरावट आई है। बीफ़ और सुअर की खपत अब पोल्ट्री की तरफ स्थानांतरित हो गई है, जिसे पर्यावरण और स्‍वास्‍थ्‍य की दृष्टि से थोड़ा-बहुत सुधार कह सकते हैं।

भारत में मांसाहारियों की संख्‍या बढ़ी

भारत में शाकाहारियों और मांसाहारियों पर कराए गए एक सर्वे में यह दावा किया गया है कि भारत में 70 प्रतिशत लोग मांसाहार का सेवन करते हैं। यह सर्वे 2014 में ‘रजिस्ट्रार जनरल ऑफ  इंडिया’ की ओर से 21 राज्‍यों में करवाया गया था। इसमें 15 साल और उससे ऊपर के लोगों को शामिल किया गया था। सर्वे में 98.8 प्रतिशत पुरुष और 98.6 प्रतिशत महिलाएं मांसाहारी निकलीं। आंकड़ों में सामने आया कि देश में मांसाहरियों का प्रतिशत वर्ष 2004 के मुकाबले कुछ गिरा है। 2004 में यह 75 प्रतिशत था जो 2014 में 71 प्रतिशत पर आ गया।

तेलंगाना सबसे ज्यादा मीट खाने वाला राज्य : सर्वे में तेलंगाना को देश में सबसे ज्यादा मीट खाने वाला राज्य बताया गया है। वहां पर करीब 99 प्रतिशत लोग मीट खाते हैं। तेलंगाना के बाद पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, उड़ीसा और केरल का नंबर आता है। इन राज्यों में भी मांसाहारियों की संख्या ज्यादा है।

शाकाहार में राजस्थान पहले नंबर पर : शाकाहारी राज्यों की बात करें तो सबसे टॉप पर राजस्थान का नंबर है। उसके बाद पंजाब, हरियाणा और गुजरात आते हैं। दिलचस्‍प बात यह है कि पंजाब में सिर्फ 33 फीसदी लोग मांसाहारी भोजन पसंद करते हैं। मध्‍य प्रदेश में शाकाहारी और मांसाहारियों की संख्‍या लगभग बराबर है, जबकि दिल्‍ली और उत्‍तर प्रदेश में ज्‍यादतर लोग मांसाहारी खाने में दिलचस्‍पी रखते हैं।

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