मेजर आदित्य के खिलाफ एफआईआर पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

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  • जम्मू-कश्मीर सरकार और अटार्नी जनरल को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में मांगा जवाब
  • कोर्ट ने अगली सुनवाई तक कार्रवाई के लिए कोई भी कदम नहीं उठाने का दिया आदेश

नई दिल्लीशोपियां फायरिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मेजर आदित्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने पर रोक लगा दी है। देश की सर्वोच्च अदालत ने मेजर आदित्य कुमार के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगा दी है। सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए सेना पर एफआईआर के मामले में शीर्ष न्यायालय ने केंद्र और जम्मू कश्मीर सरकार को नोटिस जारी किया है। राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए कोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मेजर आदित्य के पिता की याचिका पर सुनावाई के दौरान साफ निर्देश दिए कि सेना के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। मेजर कुमार समेत सेना की 10 गढ़वाल यूनिट के कर्मियों पर धारा 302 (हत्या) और 307 (हत्या के प्रयास) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। दरअसल शोपिया के गनोवपोरा गांव में जब सैन्य कर्मियों ने पथराव कर रही भीड़ पर गोलिया चलाई थीं तब दो नागरिक मारे गए थे। उसके बाद मुख्यमंत्री ने इस घटना की जांच का आदेश दिया था।

मेजर के पिता ने खटखटाया था सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा
शोपियां में गोलीबारी की घटना में पुलिस द्वारा सेना के मेजर आदित्य कुमार पर दर्ज की गई प्राथमिकी को खारिज करने की मांग करते हुए उनके पिता ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। लेफ्टिनेंट कर्नल करमवीर सिंह ने कहा था कि 10 गढ़वाल राइफल्स में मेजर उनके बेटे को प्राथमिकी में ‘गलत और मनमाने ढंग से’ नामजद किया गया है क्योंकि यह घटना अफस्पा वाले एक क्षेत्र में सैन्य ड्यूटी पर जा रहे सैन्य काफिले से जुड़़ी है। इस सैन्य काफिले को घेर कर भीड़ ने उस पर पथराव किया जिससे कई सैन्य वाहन क्षतिग्रस्त हो गए।

हिंसक भीड़ से बचने के वास्ते गोलियां चलाई गई
सिंह की अर्जी कहती है कि उनके बेटे का इरादा केवल सैन्य कर्मियों और संपत्ति को बचाना था तथा आतंकी गतिविधि पर उतरी हिंसक भीड़ से बचने के वास्ते ही गोलियां चलाई गई थीं। अर्जी के अनुसार, भीड़ से चले जाने और सेना के काम में बाधा नहीं डालने तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाने का अनुरोध किया गया लेकिन जब स्थिति नियंत्रण के बाहर चली गई तब चेतावनी जारी की गई। ऐसे में जब हिंसक भीड़ ने एक जूनियर कमीशन प्राप्त अधिकारी को पकड़ लिया और उसे पीट-पीटकर मार डालने पर उतर आई तो भीड़ को तितर-बितर करने के लिए चेतावनी में गोलियां चलाई गईं।  (एजेंसी) 

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