राम मंदिर पर सुलह का फॉर्मूला देने वाले नदवी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से बर्खास्त

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  • बोर्ड से निकाले गए नदवी बोले – बयान पर हूं कायम, शरियत में मस्जिद को शिफ्ट करने की गुंजाइश

नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए सुलह का फॉर्मूला देने वाले मौलाना सैयद सलमान हुसैनी नदवी के बयान से नाराज होकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने उनको बाहर का रास्ता दिखा दिया है। हैदराबाद में बोर्ड की तीन दिवसीय बैठक में यह फैसला लिया गया है। नदवी बोर्ड के एग्जीक्यूटिव मेंबर थे।

उधर, बोर्ड से निकाले जाने के बाद सलमान नदवी ने कहा है कि देश में अच्छा माहौल बना रहे ये बड़ी बात है। उन्होंने कहा, ‘मैंने खुद पर्सनल लॉ बोर्ड छोड़ा है। वो हार्ड लाइनर है, लेकिन हम सुलह समझौते से इस मुद्दे का हल चाहते हैं।’ नदवी ने कहा कि वह खुद 20 फरवरी को अयोध्या जाएंगे। इस मुद्दे के कोर्ट द्वारा समाधान पर उन्होंने कहा कि कोर्ट से केवल हार-जीत ही तय होगी, लेकिन असल समाधान नहीं होगा।

बता दें कि नदवी ने अयोध्या विवाद सुलझाने के लिए कहा था कि मुसलमानों को राम मंदिर के नाम पर जमीन छोड़ देनी चाहिए, साथ ही मस्जिद को कहीं और बनवा लेना चाहिए। नदवी के इसी बयान के बाद रविवार को हैदराबाद में हुई ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड  की बैठक में उन्हें बाहर कर दिया गया। बोर्ड  से बाहर किए जाने के बाद नदवी ने कहा, ‘शरियत में मस्जिद को शिफ्ट करने का प्रावधान है। मैं हिंदू-मुस्लिम एकता और उस मुद्दे को सुलझाने की बात कर रहा हूं। मैं अयोध्या में साधुओं से भी मुलाकात कर इस मसले पर चर्चा करूंगा।’

इससे पहले हैदराबाद में पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक के बाद बोर्ड के प्रवक्ता कमाल फारूखी ने मीडिया को बताया, ‘बाबरी मस्जिद में इस्लाम को मानने वालों की पूरी आस्था है। मुस्लिम उस स्थान को नहीं छोड़ेंगे और ना ही वहां से मस्जिद को कहीं शिफ्ट किया जाना उन्हें स्वीकार है। बाबरी मस्जिद एक मस्जिद है और वह अनंतकाल तक मस्जिद ही रहेगी, उसको गिरा देने से उसकी पहचान नहीं खत्म हो जाएगी। बता दें कि इसी सप्ताह ‘आर्ट आफ लिविंग’ के संस्थापक श्री श्री रविशंकर से बंगलुरु में मुलाकात करने वाले बोर्ड के कार्यकारी सदस्य मौलाना सैयद सलमान हुसैन नदवी ने कहा कि वह बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि विवाद के आपसी सहमति के समाधान का समर्थन करते हैं।  (एजेंसी)

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