कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में बोलीं सोनिया – राहुल गांधी मेरे भी बॉस

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  • मोदी सरकार पर भी बरसीं, कहा – बीते 4 साल में लोकतांत्रिक संस्‍थाओं पर हुए लगातार हमले

नई दिल्‍ली। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि राहुल गांधी उनके भी बॉस हैं, इसमें किसी को कोई संदेह नहीं रहना चाहिए। दिल्ली में गुररुवार (8 फरवरी) को कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में सोनिया गांधी ने कहा कि पार्टी को मजबूत करने के लिए वे राहुल के साथ मिलकर काम करें। सोनिया ने बैठक में कहा, ‘कांग्रेस का अब एक नया अध्यक्ष है और मैं आपकी और खुद अपनी भी तरफ से उन्हें शुभकामनाएं देती हूं। अब वह हमारे भी बॉस हैं, इसके बारे में कोई संदेह नहीं होना चाहिए।’

इस बैठक में सोनिया केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर भी बरसीं। सोनिया ने कहा, ‘मोदी सरकार अधिकतम प्रचार, न्यूनतम सरकार और अधिकतम मार्केटिंग तथा न्यूनतम परिणाम दे रही है।’ सोनिया ने कहा, ‘मोदी सरकार वास्तविकता से दूर है और प्रचार व झूठ पर जी रही है। लोकसभा में प्रधानमंत्री का भाषण इसका प्रमाण है।’ उन्होंने कहा कि भाजपा को हराने के लिए हम समान सोच वाले दलों के साथ काम करेंगे ताकि भारत लोकतंत्र, समावेश, धर्मनिरपेक्षता, सहिष्णुता और आर्थिक प्रगति के रास्ते पर चले। पूर्व कांग्रेस अध्‍यक्ष ने कहा, ‘देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं छिटपुट नहीं हैं, बल्कि संकीर्ण राजनीतिक फायदे के लिए समाज का ध्रुवीकरण करने की साजिश के तहत उन्हें जान-बूझकर अंजाम दिया गया है।’

सोनिया गांधी ने केन्द्र सरकार पर हमला करते हुए कहा, ‘लगभग 4 साल हो गए इस सरकार को सत्ता में आए हुए। ये एक ऐसा वक्त रहा जिसके दौरान वे संस्थाएं जो हमारे लोकतंत्र का स्तंभ थीं, उन पर लगातार हमला हुआ है। इनमें संसद, न्यायपालिका, मीडिया और सिविल सोसायटी शामिल हैं।’ सोनिया गांधी ने कहा कि गुजरात और राजस्थान में हुए हाल के उपचुनाव में हमने कठिन परिस्थितियों में उम्दा प्रदर्शन किया। यह दिखाता है कि बदलाव की बयार आनी शुरू हो गई है।

सोनिया गांधी ने सरकार की कश्मीर नीति पर भी सवाल उठाए। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘जम्मू-कश्मीर में हिंसा बदस्तूर जारी है और विकास को बढ़ावा देने के लिए बेहद कम काम किया गया है।’ सोनिया ने कहा, ‘हमें ताकत के साथ सीमापार आतंकवाद से लड़ना होगा। इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं हो सकता है। हम उन जवानों को नमन करते हैं तो सीने पर गोली झेल रहे हैं। हमारी संवेदना उन परिवारों के साथ है, जिनके लोगों ने देश की सेवा के लिए अपने प्राणों को न्यौछावर किया है। लेकिन इसके साथ साथ हमें यह भी पूछना होगा कि जख्म पर मरहम लगाने की नीति कहां गई, विकास को बढ़ावा देने के वादे का क्या हुआ, राजनीति सक्रियता कहां है जो तभी देखने को मिलती थी जब डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे।’  (एजेंसी)

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