सुप्रीम कोर्ट ने गोवा में 88 कंपनियों के लौह अयस्क खनन पर लगाई रोक

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  • पट्टाधारकों के खनन लाइसेंस का दूसरी बार नवीनीकरण करने पर पूर्व में लगाई गई थी रोक

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने गोवा में लौह अयस्क का खनन करने वाली 88 कंपनियों के खनन पट्टों के दूसरी बार नवीनीकरण को बुधवार को निरस्त कर दिया। शीर्ष अदालत ने केन्द्र और गोवा सरकार को निर्देश दिया कि इन्हें कानून के अनुसार नए सिरे से पर्यावरण मंजूरी प्रदान की जाए। न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि पहले दिए गए फैसले के आलोक में कानून के अनुरूप खनन के लिए नए पट्टे देना राज्य सरकार का कर्तव्य है लेकिन वह पट्टाधारकों के खनन के लाइसेंस का दूसरी बार नवीनीकरण नहीं कर सकती।

शीर्ष अदालत ने अपने पहले के फैसले में कहा था कि राज्य सरकार खनन के लिए नए पट्टे दे सकती है लेकिन पट्टों का दूसरी बार नवीनीकरण नहीं कर सकती। पीठ ने कहा कि पहले फैसले की व्यवस्था के विपरीत जिन कंपनियों के पट्टों का दूसरी बार नवीनीकरण किया गया है,  वे इस साल 15 मार्च तक खनन गतिविधियां जारी रख सकती हैं। पीठ ने कहा, ‘हालांकि उन्हें 16 मार्च, 2018 से उस समय तक खनन कार्य बंद करने का निर्देश दिया जाता है जब तक उन्हें खनन के लिए नया पट्टा (नवीनीकरण नहीं) और पर्यावरण मंजूरी नहीं मिल जाती।’ कोर्ट ने कहा, राज्य सरकार ने सभी संबंधित तथ्यों पर विचार किए बगैर और उपलब्ध सामग्री को नजरअंदाज करते हुए दूसरी बार खनन लाइसेंसों का जल्दबाजी में नवीनीकरण किया है।

पीठ ने कहा कि यह फैसला सिर्फ राज्य का राजस्व बढ़ाने के मकसद से लिया गया जो खदान और खनिज (विकास एवं नियमन) कानून की धारा 8 (3) के दायरे से बाहर था। पीठ ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा दूसरी बार खनन के पट्टों का नवीनीकरण रद्द किए जाने योग्य है और इसे निरस्त किया जाता है। शीर्ष अदालत ने विशेष जांच दल गठित करने और दूसरी बार खनन की अनुमति प्राप्त करने वाली कंपनियों से धनराशि वसूल करने के लिए चार्टर्ड एकाउन्टे का एक दल गठित करने का भी निर्देश दिया है। न्यायालय ने गैर सरकारी संगठन गोवा फाउण्डेशन की याचिका पर यह फैसला सुनाया। इसी संगठन ने पहले भी इन कंपनियों द्वारा कानून का उल्लंघन करके खनन करने का मुद्दा उठाया था।   (एजेंसी)

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