पाकिस्तान को सता रहा डर, सीपीईसी पर हमला कर सकता है भारत

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  • पाकिस्‍तान का आरोप – भारत ने 400 मुस्लिमों को हमले की ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्‍तान भेजा

इस्लामाबादपाकिस्तान की होम मिनिस्ट्री ने गिलगित-बाल्टिस्तान सरकार को एक पत्र लिखकर चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) की सिक्युरिटी पुख्ता करने का आदेश दिया है। लेटर में कहा गया है कि करोड़ों डॉलर के इस प्रोजेक्ट पर भारत हमला कर सकता है। इसमें ये भी कहा गया है कि भारत ने सीपीईसी पर हमले के लिए 400 मुस्लिम लोगों को ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्तान भेजा है। बता दें कि सीपीईसी के निर्माण पर 50 बिलियन डॉलर खर्च हुआ है।

पाकिस्तान के अखबार ‘द डॉन’ ने सोमवार को होम मिनिस्ट्री के हवाले से एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत किसी भी वक्त सीपीईसी पर हमला कर सकता है। इसके लिए उसने 400 मुस्लिम युवकों का एक दस्ता तैयार किया है। इस दस्ते को स्पेशल ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्तान भेजा गया है। अखबार के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार की होम मिनिस्ट्री ने गिलगित-बाल्टिस्तान सरकार को लेटर लिखकर कहा है कि CPEC की सिक्युरिटी फूलप्रूफ की जाए, ताकि किसी तरह की अनहोनी ना हो सके।

सीपीईसी रूट पर अब सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

होम मिनिस्ट्री के आदेश के बाद गिलगित-बाल्टिस्तान सरकार ने सीपीईसी की सुरक्षा बढ़ा दी है। इस रास्ते में 24 ब्रिज आते हैं। काराकोरम हाईवे से दिमार जिले तक यह फैला हुआ है। तमाम पुलों पर हथियारों से लैस पुलिस के जवान इस पर तैनात किए गए हैं। इलाके में मौजूद होटलों की तलाशी ली जा रही है। इसके अलावा सीपीईसी के क्षेत्र में जितने भी विदेशी नागरिक हैं, उन सभी का वेरिफिकेशन किया जा रहा है। आईजीपी शब्बीर अहमद ने होम मिनिस्ट्री के आदेश की पुष्टि की है।

भारत को सीपीईसी से इसलिए एतराज

50 बिलियन डॉलर की लागत वाला सीपीईसी पाकिस्तान के बलूचिस्तान में मौजूद ग्वादर पोर्ट और चीन के शिनजियांग को जोड़ेगा। सीपीईसी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित-बाल्तिस्तान इलाके से भी गुजरता है, जिस पर भारत का दावा है।

सीपीईसी से चीन को क्या है फायदा

इस कॉरिडोर से चीन तक क्रूड ऑयल की पहुंच आसान हो जाएगी। चीन इम्पोर्ट होने वाला 80% क्रूड ऑयल मलक्का की खाड़ी से शंघाई पहुंचता है। अभी करीब 16 हजार किमी का रास्ता है, लेकिन सीपीईसी से यह दूरी 5 हजार किमी घट जाएगी। इकोनॉमिक कॉरिडोर के जरिए चीन अरब सागर और हिंद महासागर में पैठ बनाना चाहता है। ग्वादर पोर्ट पर नेवी ठिकाना होने से चीन अपने बेड़े की रिपेयरिंग और मेंटेनेंस के लिए भी ग्वादर पोर्ट का इस्तेमाल कर सकेगा। ग्वादर चीन के नेवी मिशन के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।  (एजेंसी)

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