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आर्थिक सर्वे 2018 : टैक्स पेयर्स की संख्या में 50 फीसदी का इजाफा

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  • वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान जीडीपी ग्रोथ रेट 7 7.5% रहने का अनुमान
  • अप्रैल-नवंबर 2017 तक टैक्स में राज्यों का हिस्सा 25.2 फीसदी बढ़ा

नई दिल्‍ली। केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 पेश किया। आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान जीडीपी ग्रोथ रेट 7 से 7.5 फीसदी के बीच रह सकती है, वहीं वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान ग्रोथ रेट 6.75 फीसदी रहने का अनुमान है। लिहाजा, केन्द्र सरकार द्वारा पेश किए गए अर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, मौजूदा समय में भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से भागने वाली अर्थव्यवस्था है।

केन्द्र सरकार के मुताबिक 1 जुलाई, 2017 को जीएसटी लागू करने, दोहरी बैलेंस शीट समस्या को हल करने के लिए बैंकरप्सी कोड के प्रावधान, सरकारी बैंकों को मजबूत करने के लिए रीकैपिटेलाइजेशन प्लान, विदेशी निवेश के नियमों को और सरल करने और वैश्विक आर्थिक सुधार की स्थिति में अच्छे एक्सपोर्ट के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान 6.75 फीसदी की दर से बढ़ सकती है। आइए नजर डालते हैं आर्थिक सर्वेक्षण की खास बातों पर –

डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स पेयर की संख्या में बड़ा इजाफा

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, जीएसटी के तहत इनडायरेक्ट टैक्स पेयर की संख्या पूर्व जीएसटी व्यवस्था से 50 फीसदी अधिक है। इसके साथ ही नवंबर 2016 के बाद 1.8 मिलियन अधिक लोगों ने इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल किया है।

गैर कृषि रोजगार उम्मीद से अधिक

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, सोशल सिक्योरिटी आंकड़ों (ईपीएफओ, ईएसआईसी) के आधार पर गैर-कृषि क्षेत्र (फॉर्मल सेक्टर) में रोजगार में 30 फीसदी की बढ़त हुई है। वहीं जीएसटी के अंतर्गत रोजगार के आंकड़ों में 50 फीसदी की बढ़त दिखाई दी है।

भारत का एक्सपोर्ट सेक्टर बाकी देशों से बेहतर

सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक, देश की टॉप 1 फीसदी कंपनियां देश का कुल 38 फीसदी एक्सपोर्ट करती हैं, वहीं अन्य देशों में ये आंकड़ा भारत से खराब है। ब्राजील में टॉप एक फीसदी कंपनियां 72 फीसदी एक्सपोर्ट, जर्मनी में 68 फीसदी, मेक्सिको में 67 फीसदी और अमेरिका में 55 फीसदी एक्सपोर्ट करती हैं।

क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें सबसे बड़ा खतरा

सर्वेक्षण के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष के दौरान केन्द्र सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल है। हालांकि इस दौरान वैश्विक स्तर पर विकास दर में सुधार दर्ज होने की उम्मीद, जीएसटी में सुधार और निवेश का स्तर सुधरने से भारतीय अर्थव्यवस्था को राहत रहेगी।

जारी रहेंगे आर्थिक सुधार

सर्वेक्षण के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष के दौरान केन्द्र सरकार को जीएसटी को सामान्य करने के लिए जरूरी कदम उठाने के साथ-साथ दोहरी बैलेंस शीट, एयर इंडिया के निजीकरण और व्यापक आर्थिक मुद्दों की स्थिरता पर ध्यान देने की जरूरत है।

शहरों को जुटाना होगा वित्तीय संसाधन

देश की शहरी जनसंख्या 2031 तक 600 मिलियन का आंकड़ा पार कर सकती है, लिहाजा आर्थिक सर्वेक्षण ने केन्द्र सरकार को सलाह दी है शहरों को म्यूनिसिपल बॉन्ड, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप और क्रेडिट रिस्क गारंटी के जरिए अपने लिए वित्तीय संसाधन जुटाने की जरूरत है।

एफडीआई से बड़ी उम्मीद

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान देश में कुल एफडीआई संचार में 8 फीसदी की इजाफा हुआ है। पिछले वित्त वर्ष में 55.56 बिलियन डॉलर एफडीआई की तुलना में इस वर्ष देश में 60.08 बिलियन डॉलर का कुल एफडीआई संचार रहा।

कमाई में केन्द्र पर राज्य भारी

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक अप्रैल-नवंबर 2017 तक टैक्स में राज्यों का हिस्सा 25.2 फीसदी बढ़ा है जबकि केन्द्र सरकार का नेट टैक्स रेवेन्यू में महज 12.6 फीसदी का इजाफा हुआ।

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