भारत और आसियान के 10 देश समुद्री सहयोग बढ़ाने पर सहमत

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  • पीएम मोदी ने की भारत के प्रौद्योगिकी संस्थानों में आसियान के 1000 छात्रों को फेलोशिप देने की घोषणा
  • प्रधानमंत्री मोदी ने किया 2019 को आसियान-भारत पर्यटन वर्षके रूप में घोषित किए जाने का प्रस्ताव

नई दिल्‍ली। भारत और आसियान के 10 देश गुरुवार को समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक तंत्र बनाने पर सहमत हुए हैं। यह पहल ऐसे समय की गई है जबकि दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव को लेकर क्षेत्र में चिंता जताई जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 10 आसियान नेताओं के लिए आयोजित सैर सपाटा सत्र के दौरान समुद्री क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने के लिए तंत्र या प्रणाली बनाने पर सहमति बनी।

विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) प्रीति शरण से जब पत्रकारों ने पूछा कि रीट्रीट या सैरसपाटे के दौरान मोदी और आसियान नेताओं के बीच क्या चर्चा हुई तो जवाब में उन्होंने कहा कि नेताओं के बीच समुद्री क्षेत्र में सहयोग बेहतर करने पर चर्चा हुई। साथ ही इसमें परंपरागत और गैर-परंपरागत चुनौतियों से सामूहिक रूप से निपटने पर भी सहमति बनी। बाद में 10 आसियान देशों के नेता भारत-आसियान स्मृति शिखर बैठक में शामिल हुए। इस बैठक में भारत और आसियान संबंधों को और विस्तार देने पर चर्चा हुई।

इससे पहले पीएम मोदी ने भारत-आसियान मैत्री रजत जयंती शिखर सम्मेलन के प्रारंभिक सत्र को संबोधित करते हुए कहा, पिछले 25 वर्षों में हमारा व्यापार 25 गुणा बढ़ा है। निवेश में तेजी आई है और यह बढ़ रहा है। हम व्यापार संबंधों को और बढ़ाएंगे तथा व्यवसायियों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में भी काम करेंगे। सिंगापुर के प्रधानमंत्री और वर्ष 2018 के लिए आसियान के अध्यक्ष ली सीन लूंग ने भी मोदी का समर्थन करते हुए भारत तथा आसियान देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि दक्षिण पूर्व एशिया और भारत मिलकर दुनिया की एक चौथाई आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं।

सीन लूंग ने कहा कि आसियान देशों तथा भारत और अन्य सहयोगियों के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता, क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) दुनिया के सबसे बड़े व्यापार ब्लॉक का प्रतिनिधित्व करने का ‘ऐतिहासिक अवसर’ है। इससे आसियान क्षेत्र तथा पड़ोसी देशों के बीच व्यापार की पूरी क्षमता का दोहन करने में मदद मिलेगी। मोदी ने आसियान देशों तथा भारत के बीच साझा संस्कृति संबंधों पर जोर देते हुए वर्ष 2019 को ‘आसियान-भारत पर्यटन वर्ष’ के रूप में घोषित किए जाने का प्रस्ताव किया। पीएम मोदी ने कहा, ‘हमारी साझी यात्रा हजारों वर्ष पुरानी है। आसियान नेताओं की मेहमाननवाजी करना हमारे लिए सौभाग्य की बात है।’

पीएम मोदी ने इस मौके पर भारत के प्रौद्योगिकी संस्थानों में आसियान के 1000 छात्रों को फेलोशिप देने तथा प्रत्येक आसियान देश में एक एक डिजिटल गांव स्थापित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि आसियान नेताओं की राजधानी में मौजूदगी से हर भारतीय गदगद है। अपने संक्षिप्त भाषण में प्रधानमंत्री ने दक्षिण चीन सागर में चीन का नाम लिये बिना उसकी गतिविधियों के संदर्भ में अंतर्राष्ट्रीय कानूनों, समुद्री सुरक्षा तथा मुक्त नौवहन पर जोर दिया।

क्‍या है आसियान

इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड ने साथ मिलकर दक्षिण पूर्व एशियाई देशों का समूह यानी आसियान का गठन 8 अगस्त, 1967 को किया था। तब इस समूह को अंदाजा नहीं था यह संस्था अपनी अलग पहचान बना लेगी। अब तक आसियान के 31 शिखर सम्मेलन हो चुके हैं। 10 सदस्यों वाली इस संस्था का मुख्य मकसद दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में अर्थव्यवस्था, राजनीति, सुरक्षा, संस्कृति और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ाना था।

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