ग्लोबल वार्मिंग, आतंकवाद, आत्मकेंद्रित होना सबसे बड़ी चुनौती : मोदी

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  • दावोस से दुनिया को पीएम मोदी का संदेश- आप भारत आइए, हम आपका स्वागत करेंगे
  • पीएम मोदी बोले – अगर वेल्थ के साथ वेलनेस और प्रॉसपेरिटी के साथ पीस चाहते हैं तो भारत आएं

दावोस। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावोस में मंगलवार को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के उद्धाटन समारोह को संबोधित करते हुए दुनिया के सामने तीन प्रमुख चुनौतियों का जिक्र किया। पीएम मोदी ने आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और देशों के आत्मकेंद्रित होने को बड़ी समस्या बताया। पीएम ने अपना संबोधन हिंदी में दिया। पीएम मोदी ने कहा कि डब्‍लूईएफ की 48वीं बैठक में शामिल होते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। गर्मजोशी से स्वागत के लिए पीएम मोदी ने स्विट्जरलैंड सरकार का धन्यवाद दिया।

तीन प्रमुख चुनौतियां मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़ा खतरा

क्लाइमेट चेंज पहली चुनौती : पीएम मोदी ने कहा कि ग्लेशियर पीछे हटते जा रहे हैं, आर्कटिक की बर्फ पिघलती जा रही है – बहुत गर्मी, बेहद बारिश, बहुत ठंड। पीएम मोदी ने कहा कि आज मानव और प्रकृति की जंग क्यों है? दूसरे की संपत्ति का लालच क्यों है? हमें चुनौतियों के खिलाफ एकजुट होना होगा। भारत में शास्त्रों में कहा गया है कि हम सभी पृथ्वी की संतान हैं। अगर पृथ्वी हमारी माता है तो यह अतंर क्यों है? पीएम मोदी ने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि वातावरण को बचाने के लिए भारत सरकार ने बहुत बड़ा लक्ष्य रखा है। 2022 तक भारत में 175 गीगावॉट रिन्युअल एनर्जी के उत्पादन का लक्ष्य है।

दूसरी बड़ी चुनौती है आतंकवाद : मोदी ने कहा, ‘इस संबंध में भारत की चिंताओं और विश्वभर में इस गंभीर खतरे से दुनिया के सभी देश चिंतित हैं। मैं इससे जुड़े दो आयामों पर आपका ध्यान खींचना चाहता हूं। आतंकवाद से ज्यादा खतरनाक है अच्छा आतंकवाद और बुरा आतंकवाद का भेद करना। दूसरा है, पढ़े-लिखे युवाओं का आतंक के प्रति आकर्षित होना।’

तीसरी चुनौती है आत्म केंद्रित होना : प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘बहुत से देश आत्मकेंद्रित होते जा रहे हैं। ग्लोबलाइजेशन अपने नाम के विपरीत सिकुड़ता जा रहा है। ग्लोबलाइजेशन की चमक धीरे-धीरे कम होती जा रही है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद बने संगठनों की संरचना क्या आज के मानव की आकांक्षाओं को परिलिक्षित करती हैं? उन्होंने कहा कि विकसित देश विकासशील देश को वह टेक्नोलॉजी नहीं दे रहे हैं, जिससे कार्बन के उत्सर्जन में कमी लाई जा सके। उन्होंने कहा कि विश्व की बड़ी ताकतों के बीच सहयोग के संबंध स्थापित होने चाहिए, साथ ही उनके बीच प्रतिस्पर्धा कहीं दीवार बनकर नहीं खड़ी होनी चाहिए।

1997 में पहली बार जब भारतीय पीएम आए थे 
पीएम मोदी ने कहा कि 1997 में पहली बार कोई भारतीय पीएम दावोस आए थे। उस समय कि स्थिति आज की स्थिति से अलग थी। उस समय ना तो कोई लादेन को जानता था, ना ही हैरी पॉटर को। उस समय ना तो गूगल का अवतार हुआ था ना ही एमेजॉन पोर्टल सामने आया था।  उस जमाने में चिडि़या ट्वीट करती थी और आज मनुष्य ट्वीट करता है। पीएम मोदी ने कहा कि तकनीक को जोड़ने, तोड़ने और मोड़ने का उदाहरण सोशल मीडिया है।

डाटा नियंत्रण बना चुनौती
पीएम मोदी ने कहा कि आज डाटा पर नियंत्रण रखना सबसे बड़ी चुनौती है. ऐसा लगता है कि जो डाटा पर नियंत्रण रखेगा, वह वर्चस्व बनाए रखेगा। पीएम मोदी ने कहा कि परिवर्तन से ऐसी व्यवस्था भी पैदा हुई है जो दर्द भरी चोट पहुंचा सकती है।

हम ‘वसुधैव कुटुम्‍बकम’ को मानने वाले 
पीएम मोदी ने कहा कि मेरे लिए इस फोरम का विषय जितना समकालीन है, उतना ही समयातीत भी है क्योंकि भारत अनादिकाल से मानव को जोड़ने में विश्वास करता आया है, उसे तोड़ने या बांटने में नहीं। मोदी ने कहा कि हजारों साल पहले हमारे चिंतकों ने कहा है कि वसुधैव कुटुम्‍बकम यानी पूरी दुनिया एक परिवार है। हमारी नियतियों में एक साझा सूत्र हमें जोड़ता है। यह धारा निश्चित तौर पर दरारों और दूरियों को मिटाने के लिए और भी सार्थक है। चिंता का विषय है कि हमारी दूरियों ने इन चुनौतियों और भी कठिन बना दिया है।

भारत आने का दिया न्योता
पीएम मोदी ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के संबोधन में अंत में सभी देशों को भारत में आने का न्योता दिया। पीएम मोदी ने कहा कि अगर आप वेल्थ के साथ वेलनेस चाहते हैं तो भारत में आइए, अगर आप हेल्थ के साथ जीवन की होल्नेस यानी समग्रता चाहते हैं तो भारत में आएं और अगर आप प्रॉसपेरिटी के साथ पीस चाहते हैं तो भारत में आएं। इससे पहले दावोस में पीएम मोदी ने स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति एलेन बर्सेट और वर्ल्ड इकोनिक फोरम के चेयरमैन प्रोफेसर क्लाऊस श्वाब से मुलाकात की। (एजेंसी)

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