अब सुप्रीम कोर्ट देखेगा जज लोया की मौत से जुड़े सभी केस

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  • जस्टिस लोया से जुड़े अन्‍य मामले सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर, हाईकोर्ट में सुनवाई पर रोक

नई दिल्‍ली। सीबीआई जज बीएच लोया की संदिग्ध हालत में मौत को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। इस केस की सुनवाई चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच कर रही है। सोमवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि किसी भी हाईकोर्ट में अब जज लोया से जुड़े मामले की सुनवाई नहीं होगी। बॉम्बे हाईकोर्ट में जो दो याचिकाएं पेंडिंग हैं, उन्हें भी सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर किया जाए। कोर्ट ने दोनों पक्षकारों से कहा है कि वे अपने दस्तावेज सीलबंद कर कोर्ट को सौंपें। मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी को दोपहर दो बजे होगी।

इस बेंच में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के अलावा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ हैं। बीते शनिवार को ही इस बेंच ने इस केस को अपने हाथ में लिया है। महाराष्ट्र सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने घटना की पूरी जानकारी दी। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से दुष्यंत दवे ने साल्वे का विरोध किया। उन्होंने कहा कि साल्वे अमित शाह के बचाव में पेश हुए थे, अब वे महाराष्ट्र सरकार की ओर से हैं। इससे संस्थान की छवि धूमिल हो रही है, कोर्ट को इसे रोकना चाहिए।

सुनवाई में किसने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि कई अखबारों और मीडिया ग्रुप ने जज लोया की मौत पर सवाल उठाया है। कोर्ट ने कहा है कि मामले की सुनवाई नियमानुसार होगी, सभी वकीलों को कोर्ट के साथ सहयोग करना चाहिए। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा अभी तक की रिपोर्ट को देखते हुए यह एक प्राकृतिक मौत है।’ इस पर हरीश साल्वे ने कहा – ‘ जब पेपर्स के अनुसार ये एक प्राकृतिक मौत है तो फिर अमित शाह का नाम इसमें क्यों आ रहा है? हमें याचिकाकर्ता से किसी तरह की सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है।’

बता दें कि कुछ समय पहले एक मैग्जीन ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि जस्टिस लोया की मौत साधारण नहीं थी, बल्कि संदिग्ध थी जिसके बाद से ही यह मामला दोबारा चर्चा में आया। लगातार इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी जारी रही है। हालांकि, जज लोया के बेटे अनुज लोया ने कुछ दिन पहले ही प्रेस कांफ्रेंस कर इस मुद्दे को बड़ा करने पर नाराजगी जताई थी। अनुज ने कहा था कि उनके पिता की मौत प्राकृतिक थी, वह इस मसले को बढ़ने देना नहीं चाहते हैं।

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