जस्टिस जोसेफ बोले, मामला सुलझाने के लिए बाहरी दखल की जरूरत नहीं

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  • न्‍यायमूर्ति बोले – मामला संस्था के भीतर का है, इसे हल करने के लिए संस्था ही जरूरी कदम उठाएगी

कोच्चि। मामलों के ‘चुनिंदा’ तरीके से आवंटन और कुछ न्यायिक आदेशों के विरुद्ध देश के प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ एक तरह से बगावत का कदम उठाने वाले उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों में एक न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने शनिवार (13 जनवरी) को कहा कि समस्या के समाधान के लिए बाहरी हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है। उनके और तीन अन्य न्यायाधीशों के संवाददाता सम्मेलन के एक दिन बाद न्यायमूर्ति जोसेफ ने भरोसा जताया कि उन्होंने जो मुद्दे उठाए हैं, उनका समाधान होगा।

पत्रकारों के सवाल पर न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा, ‘एक मुद्दा उठाया गया है। संबंधित लोगों ने इसे सुना है। इस तरह के कदम भविष्य में नहीं दिखेंगे, इसलिए (मेरा) मानना है कि मुद्दा सुलझ गया है।’ यह पूछे जाने पर कि क्या इस मामले के समाधान में बाहरी हस्तक्षेप की जरूरत है तो उन्होंने कहा, ‘मामले को हल करने के लिए बाहरी हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि यह मामला संस्था के भीतर हुआ है। इसे हल करने के लिए संस्था की ओर से जरूरी कदम उठाए जाएंगे।’

न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा कि मामले को राष्ट्रपति के संज्ञान में नहीं लाया गया है क्योंकि उच्चतम न्यायालय या इसके न्यायाधीशों को लेकर उनकी कोई संवैधानिक जिम्मेदारी नहीं है। न्यायमूर्ति जोसेफ ने कहा, ‘प्रधान न्यायाधीश की तरफ से कोई संवैधानिक खामी नहीं है, लेकिन उत्तरदायित्व का निर्वहन करते हुए परंपरा, चलन और प्रक्रिया का अनुसरण किया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘न्यायाधीशों ने न्यायपालिका में लोगों का भरोसा जीतने के लिए यह किया।’

न्‍यायपालिका में कोई संकट नहीं : जस्टिस गोगोई

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई

भारत के प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ ‘चयनात्मक तरीके से’ मामलों के आवंटन और कुछ न्यायिक आदेशों को लेकर एक तरह से बगावत करने वाले उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों में से एक न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने शनिवार (13 जनवरी) को कहा, ‘कोई संकट नहीं है।’ न्यायमूर्ति गोगोई एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए आए थे। कार्यक्रम के इतर उनसे पूछा गया कि संकट सुलझाने के लिए आगे का क्या रास्ता है, इस पर उन्होंने कहा, ‘कोई संकट नहीं है।’ यह पूछे जाने पर कि उनका कृत्य क्या अनुशासन का उल्लंघन है, गोगोई ने यह कहते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि ‘मुझे लखनऊ के लिए एक उड़ान पकड़नी है, मैं बात नहीं कर सकता।’ उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश राज्य विधिक सेवा प्राधिकारियों के पूर्वी क्षेत्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए आए थे।

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