3 तलाक बिल राज्यसभा में पेश, कांग्रेस बोली – सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाए

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  • कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने संशोधनों का प्रस्ताव रखा, वित्तमंत्री अरुण जेटली ने किया विरोध

नई दिल्‍ली। लोकसभा में पास होने के बाद तीन तलाक बिल बुधवार को राज्यसभा में पेश हो गया। उच्च सदन में इस पर गर्मागर्म बहस जारी है। विपक्ष ने इस बिल को पहले सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की है। कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने संशोधनों का प्रस्ताव रखा है।

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने राज्यसभा में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक-2017 पेश किया।  प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा में बिल का समर्थन किया और राज्यसभा में इसे रोकना चाहती है। सरकार इस बिल को राज्यसभा में पास कराने के बाद जल्द से जल्द राष्ट्रपति की अनुमति के बाद कानून की शक्ल देने के मूड में है, लेकिन राज्यसभा में बीजेपी अल्पमत है।

आनंद शर्मा ने रखा संशोधनों का प्रस्ताव

कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने विपक्षी पार्टियों के सदस्यों के नाम सभापति को दिए जो सेलेक्ट कमेटी में होंगे। इनमें तीन कांग्रेस के थे। शर्मा ने कहा कि सरकार अपने सदस्यों के नाम सुझाए। कांग्रेस नेता का कहना था कि ये सेलेक्ट कमेटी बजट सत्र के दौरान अपने सुझाव सौंपेगी। उनका कहना था कि सरकार पहले संशोधनों को स्वीकार करे और फिर बिल को सेलेक्ट कमेंटी को भेजे।

विपक्ष ने 24 घंटे पहले नहीं दिया संशोधन

दूसरी ओर वित्तमंत्री अरुण जेटली ने संशोधनों का विरोध करते हुए कहा कि संशोधन 24 घंटे पहले दिए जाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और ठीक तीन बजे सदन में संशोधन रखे गए हैं। जेटली ने कहा कि आनंद शर्मा एक गलत परंपरा की नींव रखना चाहते हैं कि सदन में बहुमत वाली कोई भी पार्टी या समूह सेलेक्ट कमेटी के सदस्यों का नाम तय कर सकती है। उन्होंने कहा कि पूरा देश देख रहा है कि आपने एक सदन में बिल का समर्थन किया और दूसरे सदन में आप इसे पास होने से रोकना चाहते हैं।

क्‍या है विपक्ष का रुख

कांग्रेस पार्टी, समाजवादी पार्टी, डीएमके समेत कई विपक्षी दल ऐसे हैं जो सीधे सीधे इस बिल का विरोध तो नहीं कर रहे हैं, लेकिन चाहते हैं कि इस पर और विचार विमर्श करने के लिए इसे राज्यसभा की सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए। इन विपक्षी पार्टियों का तर्क है कि इस बिल में तीन तलाक की हालत में पति को 3 साल तक के लिए जेल भेजने का जो प्रावधान है, वह गैर जरूरी है। इससे मामला सुलझने की बजाय और ज्यादा उलझ जाएगा। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सिविल मामले को क्रिमिनल मामला बनाना ठीक नहीं है, क्योंकि ऐसे कानून का दुरुपयोग भी हो सकता है।

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