चीन की नई हाइपरसोनिक मिसाइल, भारत-अमेरिका के लिए खतरा

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  • मेरिकी मिसाइल रोधी प्रणाली थाड तक को तबाह कर सकती है एचजीवी मिसाइल

बीजिंग चीन की नई हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल डीएफ-17 भारत, जापान के साथ अमेरिका के लिए भी बड़ा खतरा बताई जा रही है। टोक्यो की ‘डिप्लोमेट’ पत्रिका ने पिछले महीने अमेरिकी खुफिया सूत्रों के हवाले से बताया था कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की रॉकेट फोर्स ने नई मिसाइल ‘हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल’ (एचजीवी) का परीक्षण किया है जिसे डीएफ-17 नाम दिया गया है।

इसका पहला परीक्षण बीते नवंबर में 2 बार किया गया था और दोनों परीक्षण सफल रहे। यह मिसाइल परीक्षण के दौरान करीब 1400 किमी तक गई थी। साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट ने बीजिंग के सैन्य विश्लेषक झोउ चेनमिंग के हवाले से कहा, ‘पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में एचजीवी बेहद जटिल है और इसे मार गिराना मुश्किल है। अमेरिका, जापान और भारत को चीन की एचजीवी तकनीक के विकास से चिंतित होना चाहिए। यह जापान में सैन्य अड्डों और भारत में परमाणु रिएक्टरों तक शीघ्रता और ज्यादा सटीकता के साथ पहुंच सकती है।’

पीएलए के पूर्व सदस्य सांग झोंगपिंग ने कहा कि एचजीवी हथियारों को बैलिस्टिक मिसाइल डीएफ-41 के साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस मिसाइल की मारक क्षमता 12 हजार किमी तक है। यह महज एक घंटे के भीतर अमेरिका के किसी भी स्थान तक मार कर सकती है। बाक्स थाड को तबाह करने में सक्षम मकाऊ के सैन्य पर्यवेक्षक एंटोनी वांग डोंग ने कहा कि एचजीवी अमेरिकी मिसाइल रोधी प्रणाली थाड तक को तबाह कर सकती है। उत्तर कोरिया के हमले से बचाव के लिए थाड को दक्षिण कोरिया में तैनात किया गया है।

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